बुढ़िया के बहुत खास मुहल्ले के लोग थे...

by yati_om on April 10, 2010, 10:21:37 AM
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yati_om
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बुढ़िया के  बहुत खास मुहल्ले के लोग थे
उसके बिना उदास मुहल्ले के लोग थे

बेटी जवान रो रही थी मॉं की लाश पर
आँखों में लिए प्यास मुहल्ले के लोग थे

हर मातमी नज़र से ख़ुशी झांकती मिली
इतने तो बदहवास मुहल्ले के लोग थे

वह रात किन्ही बाज़ुओं में चीखती रही
हालाँकि आस-पास मुहल्ले के लोग थे

जिसकी सज़ा में ख़ुदकुशी करनी पड़ी उसे
उस जुर्म का प्रयास मुहल्ले के लोग थे

                      -ओमप्रकाश यती

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«Reply #1 on: April 10, 2010, 10:22:08 AM »
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बुढ़िया के  बहुत खास मुहल्ले के लोग थे
उसके बिना उदास मुहल्ले के लोग थे

बेटी जवान रो रही थी मॉं की लाश पर
आँखों में लिए प्यास मुहल्ले के लोग थे

हर मातमी नज़र से ख़ुशी झांकती मिली
इतने तो बदहवास मुहल्ले के लोग थे

वह रात किन्ही बाज़ुओं में चीखती रही
हालाँकि आस-पास मुहल्ले के लोग थे

जिसकी सज़ा में ख़ुदकुशी करनी पड़ी उसे
उस जुर्म का प्रयास मुहल्ले के लोग थे

                      -ओमप्रकाश यती

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«Reply #2 on: April 10, 2010, 10:22:50 AM »
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बुढ़िया के  बहुत खास मुहल्ले के लोग थे
उसके बिना उदास मुहल्ले के लोग थे

बेटी जवान रो रही थी मॉं की लाश पर
आँखों में लिए प्यास मुहल्ले के लोग थे

हर मातमी नज़र से ख़ुशी झांकती मिली
इतने तो बदहवास मुहल्ले के लोग थे

वह रात किन्ही बाज़ुओं में चीखती रही
हालाँकि आस-पास मुहल्ले के लोग थे

जिसकी सज़ा में ख़ुदकुशी करनी पड़ी उसे
उस जुर्म का प्रयास मुहल्ले के लोग थे

                      -ओमप्रकाश यती

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Riyaz Ashna
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«Reply #3 on: April 10, 2010, 01:22:02 PM »
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वाह, ओम प्रकाश जी बहुत उत्तम रचना है आपकी । बधाई एवं शुभकामनाएं स्वीकार करें ।

एक ही रचना तीन बार पोस्ट हो गई थी अत: एक ही स्थान पर कर दी गईं हैं । धन्यवाद ।
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Rajesh Harish
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«Reply #4 on: April 10, 2010, 03:02:06 PM »
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Bahut khoob Om Ji
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«Reply #5 on: April 10, 2010, 04:39:13 PM »
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Bahut hi khoobsurat rachna likhi hai aapne omprakash ji...!!!
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«Reply #6 on: April 10, 2010, 09:25:06 PM »
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बुढ़िया के  बहुत खास मुहल्ले के लोग थे
उसके बिना उदास मुहल्ले के लोग थे

बेटी जवान रो रही थी मॉं की लाश पर
आँखों में लिए प्यास मुहल्ले के लोग थे

हर मातमी नज़र से ख़ुशी झांकती मिली
इतने तो बदहवास मुहल्ले के लोग थे

वह रात किन्ही बाज़ुओं में चीखती रही
हालाँकि आस-पास मुहल्ले के लोग थे

जिसकी सज़ा में ख़ुदकुशी करनी पड़ी उसे
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                      -ओमप्रकाश यती


वाह, ओम प्रकाश जी बहुत उत्तम रचना है आपकी । बधाई एवं शुभकामनाएं स्वीकार करें ।

एक ही रचना तीन बार पोस्ट हो गई थी अत: एक ही स्थान पर कर दी गईं हैं । धन्यवाद ।

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SURESH SANGWAN
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«Reply #7 on: April 11, 2010, 06:50:28 AM »
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bahut achhi hai omprakashji aapki kavita.. Applause Applause Applause
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yati_om
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«Reply #8 on: April 11, 2010, 01:22:43 PM »
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rachna padhne aur posting ki ghalti theek karne ke liye bahut-bahut dhanyavad......"yati"
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yati_om
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«Reply #9 on: April 11, 2010, 01:28:31 PM »
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बुढ़िया के  बहुत खास मुहल्ले के लोग थे
उसके बिना उदास मुहल्ले के लोग थे

बेटी जवान रो रही थी मॉं की लाश पर
आँखों में लिए प्यास मुहल्ले के लोग थे

हर मातमी नज़र से ख़ुशी झांकती मिली
इतने तो बदहवास मुहल्ले के लोग थे

वह रात किन्ही बाज़ुओं में चीखती रही
हालाँकि आस-पास मुहल्ले के लोग थे

जिसकी सज़ा में ख़ुदकुशी करनी पड़ी उसे
उस जुर्म का प्रयास मुहल्ले के लोग थे

                      -ओमप्रकाश यती  mamtaji,rachna par utsahvardhak pratikriya ke liye bahut-bahut dhanyavad..."yati"
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