मसले रसोई के क्यूँ आप सड़कों पर लाते हो।

by kavyadharateam on September 12, 2018, 12:54:06 AM
Pages: [1]
ReplyPrint
Author  (Read 47 times)
kavyadharateam
Shayari Qadrdaan
***

Rau: 15
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
22 hours and 39 minutes.

Deepak Sharmaa

Posts: 207
Member Since: Sep 2008


View Profile WWW
Reply with quote
मसले रसोई के क्यूँ आप सड़कों पर लाते हो।                                             इससे क्या फ़र्क पड़ता है आप क्या खाते हो।।

सुर्खियाँ बने रहने की अब आदत हो गयी आपकी।
इसलिए बात बेतुकी हर बात पर कह जाते हो।।

मांस खाओ,चमड़ी खाओ,ये  मर्ज़ी है आपकी।
अरे घर में खाओ,सड़कों पे दंगे क्यों करवाते हो।।

गोश्त खाना पाप नही है,हम तो लाज़िम खायेंगे।
आप हमें बताओ कि ये सब क्यों हमको बतलाते हो।।

ज़ाहिलों  की क़ब्र पर कभी घास तक उगती नहीं।
फिर बेज़ा क्यूँ बोलकर ज़ाहिल तुम कहलाते हो।।

कल तुम हमामो-बारगाह के किस्से हमें बताओगे।
किसके संग तुम सोते हो,संग किसे नहलाते हो।।

गर वक़्त नहीं कटता है तो बच्चे ग़रीब पढ़ाइये।
जाकर तालीमें बाँटिये,बेकार क्यों भेजा खाते हो।।

फिर कहोगे आप पर क्यूँ मुल्क़ ये सारा हँसता है।
ख़ुद अपनी पोशाकों पे क्यों ख़ुद रायता फैलाते हो।।

एक ज़ुबाँ किसी आदमी को अर्श पर ले जाती है।
क्यों अर्श से फ़र्श पे एक लम्हे में आप आ जाते हो।।

"दीपक" है हमराह इसलिये जल के राह दिखाता है।
पर आप उससे कह रहे क्यूँ रोशनी दिखलाते हो।।

सर्वाधिकार@दीपक शर्मा
Logged
Миша
Guest
«Reply #1 on: September 12, 2018, 06:38:16 AM »
Reply with quote
Позвоните мне, пожалуйста, по  номеру 8(951)689-49-50
Logged
surindarn
Mashhur Shayar
***

Rau: 246
Online Online

Waqt Bitaya:
85 days, 8 hours and 23 minutes.
Posts: 16726
Member Since: Mar 2012


View Profile
«Reply #2 on: September 12, 2018, 04:45:53 PM »
Reply with quote
मसले रसोई के क्यूँ आप सड़कों पर लाते हो।                                                                                                                                                
इससे क्या फ़र्क पड़ता है आप क्या खाते हो।।

सुर्खियाँ बने रहने की अब आदत हो गयी आपकी।
इसलिए बात बेतुकी हर बात पर कह जाते हो।।

मांस खाओ,चमड़ी खाओ,ये  मर्ज़ी है आपकी।
अरे घर में खाओ,सड़कों पे दंगे क्यों करवाते हो।।

गोश्त खाना पाप नही है,हम तो लाज़िम खायेंगे।
आप हमें बताओ कि ये सब क्यों हमको बतलाते हो।।

ज़ाहिलों  की क़ब्र पर कभी घास तक उगती नहीं।
फिर बेज़ा क्यूँ बोलकर ज़ाहिल तुम कहलाते हो।।

कल तुम हमामो-बारगाह के किस्से हमें बताओगे।
किसके संग तुम सोते हो,संग किसे नहलाते हो।।

गर वक़्त नहीं कटता है तो बच्चे ग़रीब पढ़ाइये।
जाकर तालीमें बाँटिये,बेकार क्यों भेजा खाते हो।।

फिर कहोगे आप पर क्यूँ मुल्क़ ये सारा हँसता है।
ख़ुद अपनी पोशाकों पे क्यों ख़ुद रायता फैलाते हो।।

एक ज़ुबाँ किसी आदमी को अर्श पर ले जाती है।
क्यों अर्श से फ़र्श पे एक लम्हे में आप आ जाते हो।।

"दीपक" है हमराह इसलिये जल के राह दिखाता है।
पर आप उससे कह रहे क्यूँ रोशनी दिखलाते हो।।

सर्वाधिकार@दीपक शर्मा

waah waahhhh waaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh.......................... ..
 Thumbs UP Applause Applause Applause Applause Applause Applause Applause Applause Applause Applause Applause
Logged
Pages: [1]
ReplyPrint
Jump to:  

+ Quick Reply
With a Quick-Reply you can use bulletin board code and smileys as you would in a normal post, but much more conveniently.


Get Yoindia Updates in Email.

Enter your email address:

Ask any question to expert on eTI community..
Welcome, Guest. Please login or register.
Did you miss your activation email?
September 19, 2018, 08:03:42 PM

Login with username, password and session length
Recent Replies
[September 19, 2018, 07:25:36 PM]

[September 19, 2018, 06:57:36 PM]

[September 19, 2018, 06:56:29 PM]

[September 19, 2018, 06:55:27 PM]

[September 19, 2018, 06:54:06 PM]

[September 19, 2018, 06:53:18 PM]

[September 19, 2018, 06:52:12 PM]

[September 19, 2018, 06:51:14 PM]

[September 19, 2018, 06:50:25 PM]

[September 19, 2018, 06:49:34 PM]
Yoindia Shayariadab Copyright © MGCyber Group All Rights Reserved
Terms of Use| Privacy Policy Powered by PHP MySQL SMF© Simple Machines LLC
Page created in 0.16 seconds with 24 queries.
[x] Join now community of 48305 Real Poets and poetry admirer