यक्ष प्रश्न

by jht on April 23, 2015, 12:11:35 PM
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jht
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मैं भेङिया हूँ
वहशी, आदमखोर
नोचना, खसोटना अच्छा लगता है मुझे
जिस्म को रौंद डालना
रूह तक को छलनी कर देना
सब अच्छा लगता है मुझे
फर्क नहीं पङता कि वह मुझे जन्म दी
मेरी कलाई पर राखी बाँधी
या मेरे ही खून से उपजी मेरी बेटी है
मुझे तो उसमें केवल ‘देह’ दीखता है
केवल ‘माँसल देह’
माँस देखकर मेरे रगों में उबाल आता है
मुँह से लार टपकने लगता है
और फिर.. वह मेरे कातिल पंजे में होती है

अगले ही पल -
किसी चौराहे पर
जख्मी जिस्म और उखङती साँसें ,
खून के थक्कों पर भिनभिनाती मक्खियाँ
और
किसी पेङ पर टंगी
जिन्दगी को तरसती रूह को छोङकर
मेरी गिद्ध नजरें निकल पङती हैं
किसी और निर्भया की तलाश में –

पर मुझे शर्म नहीं आती
ना कोई आत्म-ग्लानि होती
ना ही मेरे हृदय में कोई स्पंदन होता
क्योंकि मैं भेङिया हूँ

लेकिन तुम -
खुद को मर्द कहते हो न .. ?
तो कैसे मर्द .. ?
और कैसी तुम्हारी मर्दानगी .. ?

(यह कविता नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, गुवाहाटी द्वारा पुरस्कृत की गई है ।)
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qalb
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«Reply #1 on: April 23, 2015, 01:06:11 PM »
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मैं भेङिया हूँ
वहशी, आदमखोर
नोचना, खसोटना अच्छा लगता है मुझे
जिस्म को रौंद डालना
रूह तक को छलनी कर देना
सब अच्छा लगता है मुझे
फर्क नहीं पङता कि वह मुझे जन्म दी
मेरी कलाई पर राखी बाँधी
या मेरे ही खून से उपजी मेरी बेटी है
मुझे तो उसमें केवल ‘देह’ दीखता है
केवल ‘माँसल देह’
माँस देखकर मेरे रगों में उबाल आता है
मुँह से लार टपकने लगता है
और फिर.. वह मेरे कातिल पंजे में होती है

अगले ही पल -
किसी चौराहे पर
जख्मी जिस्म और उखङती साँसें ,
खून के थक्कों पर भिनभिनाती मक्खियाँ
और
किसी पेङ पर टंगी
जिन्दगी को तरसती रूह को छोङकर
मेरी गिद्ध नजरें निकल पङती हैं
किसी और निर्भया की तलाश में –

पर मुझे शर्म नहीं आती
ना कोई आत्म-ग्लानि होती
ना ही मेरे हृदय में कोई स्पंदन होता
क्योंकि मैं भेङिया हूँ

लेकिन तुम -
खुद को मर्द कहते हो न .. ?
तो कैसे मर्द .. ?
और कैसी तुम्हारी मर्दानगी .. ?

(यह कविता नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, गुवाहाटी द्वारा पुरस्कृत की गई है ।)




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surindarn
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«Reply #2 on: April 24, 2015, 02:10:11 AM »
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«Reply #3 on: April 25, 2015, 08:49:57 AM »
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bohat ache thanks for sharing
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With a Quick-Reply you can use bulletin board code and smileys as you would in a normal post, but much more conveniently.


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