manu.gupta.iitm
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Waqt Yoindia ko Diya: 19 minutes.
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« on: June 15, 2008, 10:15:42 AM » |
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हर तरफ़ सब हँस रहे ,इक मैं ही आँसुओं का मारा हूँ, हर तरफ़ सब बस रहे, मैं ही इक आवारा हूँ। चल रहे सब साथ में, डाले हाथों मे हाथ, छटपटाता और तरसता, मैं ही इक बेचारा हूँ। दिल मे मेरे क्या है, ये कोई क्यूँ पहचानेगा, सब दिखावा कर रहे, ये दर्द क्या कोई जानेगा। हर किसी के साथ मे कोई ना कोई चल रहा, चुपचाप हाथ बाँधकर राह पर हूँ मैं खड़ा अकेलेपन का यही गम, मुझे मन ही मन खाये जाता, डराते हुए इस मन को मेरे, सँकरा कर रुलाये जाता, ढूँढता हूँ मैं भी हँसते इंसानों को इस भँवर में, कहीं तो कोई हो जो गले लगकर, दिल की दो बातें करले। नकली हँसी के मायाजाल में, मुझसे नहीं अब हँसा जाता, देखकर दूसरों की मुस्कुराहट, हम भी मुस्कुरा देते हैं, पल दो पल के लिये। इक वक्त था जब हम भी दिल से हँसते थे, और हँसाते दूसरों को..... पर हमें क्या मालूम था कि वो हैं हमीं पर हँस रहे। अरसा बीत गया अब तो, ऐ मेरे दिल! दिल से मुझको हँसे हुए.... बोल,तुझे क्या है लगता ??क्या ये सब नकली नहीं?? तब ये मेरा दिल है बोला मुझसे.... क्यूँ खुशी को ढूँढता तू, है अपने चारों तरफ़, ये तो बसती ही है तुझमे, एक कस्तूरी के जैसे, क्यूँ आशा करता है कि, हाथ तेरा कोई थाम ले, क्यूँ ना तू अपने ही हाँथ, विश्वास से ही थाम लेता, झाँक ले इन सब के अंदर, ये सब भी भरे हैं दर्द से। रोना और डरना यहाँ, किसी मुश्किल का हल नहीं, कर भरोसा खुद पे तू, ये मुश्किलें इतनी भी मुश्किल नहीं.... राह चलता जा ऐ रही, जी ले हर पल इस धरा पर, कर्म करता जा तू अपना, कि तेरी भी कीमत कम ना हो, कर ले तन्हाई से नाता, कि अबकि कोई गम ना हो। आया अकेला इस ज़मीं पर, जाना अकेले है यहाँ से, फ़िर क्या गम है तुझको यारो, ये पल अकेले जीने मे ............
To live is not enough, the trick is to live with YOURSELF................
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