आखिर क्यूँ आखिर क्यूँ ?.... ऋषि अग्रवाल

by Rishi Agarwal on December 27, 2012, 04:05:36 PM
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Rishi Agarwal
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जब बेटियों के संग
कुछ ऐसा घटित होता है
दिल बहुत रोता है
बहुत रोता है दिल देख कर
इक्कीसवीं सदी में भी हम
वहीँ के वहीँ अंधेरों में घिरे
अनेकों योजनायों के बाद भी
उसी तरह अपंग से ढोल पीटते रहे
अपनी सफलता के कामयाबी के
हर रोज होती रही अबला बेसहारा बेटियाँ
शिकार इस क्रूर अन्याय की
जहाँ कोई ना था उन्हें बचाने वाला
कभी देहज की बलि चढ़ गयीं तो
कभी कोख में ही दफ़न हो गयीं
कभी सरे आम नीलाम हो गयीं और
कभी अग्नि की भेट चढ़ गयीं
आखिर ऐसा क्यूँ होता है लड़की के साथ
जब की वही लड़की बहिन है बेटी है माँ है बहु है
क्यूँ भूल जाते हैं वे की उन्हें जन्म देने
वाली माँ भी औरत ही है
क्यूँ वहशी से हो जाते हैं
क्यूँ दरिंदे बन जाते हैं
आखिर क्यूँ आखिर क्यूँ ?
मैं आप से पूछता  हूँ ...
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nandbahu
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«Reply #1 on: December 27, 2012, 04:25:50 PM »
bahut khoob, kash sab aisa samajh pate
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Rishi Agarwal
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«Reply #2 on: December 27, 2012, 05:25:12 PM »
bahut khoob, kash sab aisa samajh pate

 शुक्रिया नंद्बहू जी..
आप सही कहते हो की काश सब ऐसा समझ पाते..
पर नंद्बहू जी सब एक पल में समझ जाये अगर देश का कानून सऊदी देश जैसा हो जाये
पर हमारी सरकार और हमारे कानून नपुंशक हैं.. यहाँ पे जुर्म करने वाला बेकौफ होकर
जुर्म करता हैं क्युकी उसे पता हैं कुछ दिन आवाज गूंजेगी फिर कही न कही किसी ना किसी कौने में ये फाइल क्लोज हो जाएगी.. हमारे राजस्थान में कुछ महीने पहले  राजस्थान का जिला सीकर (शेखावाटी) में रात को करीब ८ बजे कुछ बच्चे घर आ रहे थे उसमे कुछ लडकिया वो सब फिल्म देख कर घर आ रहे थे.. एक लड़की करीब १८ साल  की थी और एक १४ साल की थी.. अचानक से एक गाड़ी आई और उसमे बड़ी वाली लड़की जो १८ साल की थी उसे गाडी में ज़बरदस्ती डालने लगे पर लड़की उन्हें धक्का दे भाग गई पर उन दरिंदो ने १४ साल की लड़की को पकड़ लिया और उसे पूरी रात अपनी हवस का शिकार बनाया करीब ४ लोग थे.. और ४ दिन उस केस को हवा मिली और फिर वापस दफ़न हो गया और मुजरिम बेकौफ घुमने लगे.. अब इन सब का कौन जिमेदार..
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sksaini4
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«Reply #3 on: December 27, 2012, 05:29:00 PM »
bahut sunder
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«Reply #4 on: December 27, 2012, 05:29:56 PM »
bahut sunder

शुक्रिया सर
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«Reply #5 on: August 14, 2013, 12:14:51 AM »
विचार तो हैं बहुत कुछ बदलने का पर हाय ये दुनिया वालें
ना अच्छे में साथ देते हैं ना बुरे करने पे जीने देते हैं..
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