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Original Quotes of Yoindians
zindagi  vich kuch shikhiya hove ja na
Pr ik gal jarur shik lai hai
Jis di kadar asi bahoot krde han
Oh tuhdi kadi bhi kadar nahi krda oh aksar dil nu torda hai
Fr has ke ehi bolda hai
Meri ki galti hai
han oh sach bolda hai
galti us di nahi sadi jo asi us nal bahoot jada lagab peda kr liya

Posted by:RAJAN KONDAL
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जंगल में शबरी के झूठे बेर को सस्नेह पूर्वक खाना
दुश्मन को युद्ध से पहले ही चरणों में अपने गिराना
दिल में ज़रा भी नफरत माँ कैकई के लिए न लाना  
भाईयों को अपने अपनी पलकों पर पल पल बैठाना  
बिना किसी भेद भाव न्याय प्रणाली को राज्य में चलाना
...
हुस्न तेरा ये कोहिनूरी है
अब्र की शिद्दतें भी पूरी हैं .... (अब्र = बादल, शिद्दत  = intensity)
दिल संभाले तो कोई कैसे बता
कुछ तो कहना तुझे ज़रूरी है

ये चमक है तेरा सुरूर-ए-नशा  .... (सुरूर = toxic)
आँख तेरी ये चश्म-ए-नूरी है  .... (चश्म-ए-नूरी = प्रकाश सी नज़र )
देख अपनी नज़र को देख ज़रा
देख...
Rakh diya Girbee,, Khud ko unki mohabbat ke liye...

Aur woh hai ki tadapte Hain kisi aur ki mohabbat ke liye...

Kisi Ne Poocha !!!
Kabhi Ishq Hua Tha,
Hum Muskuraake Bole,
Aaj Bhi Hai,.

-Azeem Azaad,.
Jabse Huwe Hain Unkay Ham
Door Huwe Hain Saare Gham

Dil Ab Bada Hi Shaad Hai
Aankhen Bhi Ab Nahi Hain Nam

Har Shae Mili, Milay Jo Wo
Khushiyan Hi Ab Hain Dam’ba’Dam

Ranj’o’Malaal Mit Gaye
Dard’o’Alam Huwe Hain Kam

Unkay Hi Ek Saath Se
Jeena Hai Ab Khadam Kha...
#माँ शारदे का

हम कमाल है वो बवाल है,
लगता अपने आप में सवाल है।
हर बात में है सन्देह की पुड़िया,
इशारों पर नचानेवाली पत्थर की गुड़िया।
न श्रृंगार उसे भाता है कुरूपता की मूर्ति,
पर अपने को समझे मेनका की प्रतिमूर्ति।
सुना है ताड़का, सूपनखा थी राक्षसीयां,
पर वो है कलयुग की जागती प्रेतात्मा।
मन्द...
Wo Hawa si ban kar Gujar Gaye
Pass se humare

Wo humare liye Rukk bhi na sake
To ,,,SHIKAYAT,,, bhi kya kare
अश्क हूं मैं तुम्हारा,आंखे हो तुम।मेरी।
कंठ हूं मै तुम्हारा,आवाज हो तुम मेरी।।
कैसे अलग हो सकता हूं मैं अब तुमसे,
जब जोड़ी बनाई है प्रभु ने हमारी तुम्हारी।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम
करना ही पड़ा जिक्र तुम्हारा ,,,,
   शायरी में मोहब्बत कुछ कम थी
इश्क ना हो जाए पढ़ते हुए तुमको ,,,,,
      काग़ज़ पर कहानी नही मोहब्बत लिखी है
तुम्हे सोच कर बेचैन रहते हैं ,,
     ऐसा सुकून कहीं और नही मिलता
तमाम गुनाह कबूल कर लिए हमने ,,,,
    उनके इल्जाम ही इतने हसीन थे
खुद ही कर ली कबूल सजा हमने ,,,,,
    मेरा दिल भी तुम्हारे हक में गवाही दे रहा था
तुम्हारे ख्वाब आना कोई इत्तेफाक नही ,,,,,
    हमें नींद ही इस शर्त पे आती है
ना सोचो हमसे दूर जाने की ,,,
     करीब हम आए थे तुम नहीं
तुम्हारी नाराजगी भी जायज है शायद ,,,,
     हमें मनाने का हुनर जो आता है
काश शायर का दिल पथर ना होता ,,,,
    तो काग़ज़ पर लिखा हर लफझ गिला होता
चाह कर भी तुमसे मैं कुछ नही कहूँगा ,,,,,
       तुम समझ जाओगे जब मेरी खामोशी बोलेगी
यही गुज़ारिश के सजा कम ना देना मुझे ,,,,
    मैंने गुनाह ए इश्क़ उमर क़ैद के लिए किया  है
तुम्हें पाने की ख़्वाहिश में ,,,,
    मैंने खुद को खो दिया
कर दो सारे सबूत खिलाफ मेरे ,,,,
    मेरी मोहब्बत की गवाही तुम ही दोगी
मेरे दिल से न पूछ हाल मेरा ,,,,
  यह तेरे सिवा किसी को नहीं जानता
इतना क्यों सोच रहे हो ,,,,
  साजिश करनी है यां मोहब्बत
Saal 2014 ye woh waqt tha jab asal kamyabi mujhe mili thi, main taqreeban 5 saal se kahaniya likhte jaa raha tha mujhe wo break nahi mil raha tha jiski mujhe talash thi, ye talash oosi saal khatam huyi jab main kamyabi ke moqam par tha aur maine back 2 back kayi safal horror kahaniya likh daali a...
सबूत मांग रहे हैं हमसे मोहब्बत का ,,,,,
आपको देख कर जिंदा है यह काफी नहीं
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