Welcome to Yoindia Shayariadab
A community of 8519 of real poets and poetry admirer from whole globe.
Join Now and unleash the poet inside you!
Tip of the moment...
Never post same poem multiple times. It only creates confusion and decreases chances of appreciation.
Latest Shayari at Yoindia Shayariadab
- Tareeq
- तुम्हे तो हम मोहब्बत ,,,saahill
- खामोश रहना ,,,, saahill
- कोई दवा तो बता ,,,,saahill
- सांसें सिमटी ,,,,,saahill
- माना के मेरी मोहब्बत ,,saahill
- Ek Hisaab Baaki Hai........... Touhid
- सहरा के आस-पास न सागर के आस-पास
- मेरे सिवा तुझे और कोई न देख सके
- zarraa se aaftaab ka itna raha safar
See more..
Laut Aati Hain Wo Tareeqein,. Magar Wo Din Laut Kar Nahi Aate,.
May Allah Bless You,. Happy Belated Birthday
तुम्हे तो हम मोहब्बत कहते रहे ,,,, तुम तो हमारी ज़िंदगी निकले
कोई पूछे तुमसे तुम्हारा पता तो खामोश रहना ,,,, तुम्हारे सिवा कोई मेरे दिल तक पहुंचे यह ग्वारा नहीं
कोई दवा तो बता रोग ए इश्क की ,,,, मर्ज भी बढ़ जाए और आराम भी आ जाए
मेरे टूट जाने की हद तो देखो ,,,, सांसें सिमटी मगर ज़िंदगी बिखरी हुई है
माना के मेरी मोहब्बत शराबी है ,,,, क्या करूं इसे नशा जो तुम्हारा लगा है
Ta-Umra Guzaar Dii Usne Nafaa Nuksaan Karne Mein...
Ta-Umra Guzaar Dii Usne Nafaa Nuksaan Karne Mein...
Mout Aayi To Kaha Usne Pata Ke Ek Hisaab Baaki Hai....
:- Touhid -:
सहरा के आस-पास न सागर के आस-पास तन्हा हैं लोग मॉल थिएटर के आस-पास
दुनिया का इक तवील सफ़र तय तो कर लिया मैं घर की राह भूल गया घर के आस-पास
क्यूँ चलते-चलते हमसफ़रो गिर पड़ा हूँ मैं पत्थर कोई मिला नहीं ठोकर के आस-पास
हर कोई बातचीत करे दूर-दूर से रहकर...
तू लिख मुझे इस तरह,मेरा सिवा कोई पढ़ न सके, छिपा ले अपने दिल मे इस तरह कोई देख न सके। तेरे हर लफ्ज़ मे जिक्र हों मेरा मगर इस तरह कि, तेरे सिवा जिक्र मेरा कोई और बंदा न कर सके।।
बात मुझसे इस तरह कर, कोई दूसरा ना सुन सके स्वप्न मेरे लिए ऐसे बुनना , कोई दूसरा ना बुन सके।<...
ज़र्रा से आफ़ताब का इतना रहा सफ़र लम्बा था इंतज़ार सा जीवन सा मुख़्तसर
राहे-तलब* थी या कि वो राहे-नजात** थी तय की बग़ैर मैप ही हर एक रहगुज़र *इच्छा पथ **मुक्ति मार्ग
रक्खी न हिज्र में कभी उम्मीद वस्ल की इस दर्दे-दिल को बनने दिया है न दर्दे-सर...
अक्सर मोहब्बत से बातें होती हैं,,, बस तुम्हारा ही ज़िक्र करती है वो
मेरी खामोशी को पड़ना कभी,,, लफ़्ज़ों में मेरा किरदार अधूरा सा है
ऐ खुदा कहाँ मिलेगी वो कलम ये बता ,,,, उसके नाम की लकीर हाथ मे खींच दूँ जिस से
Bahut kuch kehna tha tumse, ek baar mauka to deti...
Mere dil mein dabe toofanon ko, kinara to deti. Faisla suna kar chal di tum, meri safai sune bina, Kam se kam meri wafao’n ko, sahara to deti.
Wo lafz jo honton tak aakar, phir aansu ban gaye, Un bheege hue alfazon ko, ishara to deti. ...
bade saleeke se hum apne zakhm chupate hain, wo puchte hain haal to hum bas muskuraate hain, tujhse koi gila nahi, na koi shikayat hai ab, bas kabhi-kabhi tute hue khwaab bohot sataate hain,
suna hai wo khush hain apni nayi duniya mein, hum aaj bhi purani yaadon se dil behlate hain, maloom ...
Kya Itna Asaan Hota Hai Azeem,. Duaaon Mein Maange Hue Shaqs Ko Bhool Jaana,.
-Azeem Azaad,.
ऐ शमअ कुछ तो कर तेरे परवाने आ गए तू गुल हुई है और वो जल जाने आ गए
हमको लगा कि घर को ये महकाने आ गए पर फूल जानते हैं कि मुरझाने आ गए
शोहरत का है फ़रेब कि सब अपने नाम को साहिल की गीली रेत पे गुदवाने आ गए
मिलने चले थे आपसे हामी के वास्ते जब आप अपनी ब...
शिकवा ना करें के हम लिखते नहीं अक्सर,,,, कभी तो हमारी खामोशी को पड़िये
हम बुरे हैं तेरी नज़र में तो यही सही,,, सुना था तुम सिर्फ अच्छा ही देखते हो
हम यूँ ही तुम्हे जिंदगी नही कहते,,, तुम्हारे बिना तो साँसे भी नही चलती
मेरे दिल में घर बना सकते हैं आप जा चुका हूँ मैं अब आ सकते हैं आप
देखिए काम आ गया हूँ आपके अब मुझे वापिस भुला सकते हैं आप
आलिमों की ख़ामुशी पहचानिए जाहिलों से दाद पा सकते हैं आप
बोलिए इतना सुकूत* अच्छा नहीं आइने को ही सुना सकते हैं आप *मौन...
ख़ुश रहकर गुजारो, तो मस्त है जिंदगी। दुःखी रहकर गुजारो,तो त्रस्त है जिंदगी।।
तुलना मे गुजारी, तो पस्त है जिंदगी। इंतजार मे गुजारी, तो सुस्त है जिंदगी।।
सीखने मे गुजारी, तो किताब है जिंदगी। दिखावे मे गुजारी, तो बर्बाद है जिंदगी।।
ईर्ष्या मे गुजारी,तो बेकार है ये जिंदगी। जलन मे गुजारी...
कभी-कभार ख़ुशी भी उधार ली जाए उदास शाम है हँसकर गुज़ार ली जाए
हमारे प्यार को दुनिया की लग न जाए नज़र ज़रा झगड़ के नज़र भी उतार ली जाए
अब इस जहान में मँहगी बहुत हुई है जगह कोई ज़मीन सितारों के पार ली जाए
तलब तो रोज़ करे स्कूल ज़िम्मेदारी का मगर क...
कुछ नहीं अब यहाँ बचा मेरा नीमजाँ तक ज़बूँ अदा मेरा
और भी थे कदम गदाई के यार वो खा गया क़ज़ा मेरा
ज़िन्दगानी रफ़ू हुई ऐसे गुफ़्तगू भी ज़ियाँ नुमा मेरा
चार अहल-ए-सुख़न मुक़र्रर थे तब कहीं पर अयाँ ख़ता मेरा
वो चली थी हवा कहीं से तो राहज़न यूँ कहाँ वफा मेरा
बेमज़ा लब पिए नहीं कामिल...
घर कितना बड़ा है यह मायने नही रखता, घर मे कितने खुशहाल है ये मायने रखता। घर तो सभी बना लेते है अपने रहने के लिए, घर जो दूसरे के लिए बनाये ये मायने रखता।।
आर के रस्तोगी गुरुग्राम]
|