प्रभु तुम भक्त जनों के संकट हरते ---आर के रस्तोगी

by Ram Krishan Rastogi on November 05, 2019, 05:58:32 PM
Pages: [1]
Print
Author  (Read 32 times)
Ram Krishan Rastogi
Yoindian Shayar
******

Rau: 62
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
27 days, 22 hours and 58 minutes.

Posts: 4155
Member Since: Oct 2010


View Profile
प्रभु तुम भक्त जनों के संकट हरते,
मै कष्टों के अब भण्डार में हूँ |
प्रभु तुम केवल शुद्ध हवा पानी दे दो ,
मै मरने के अब कागार पर हूँ ||

प्रभु,तुम करुणा के सागर हो,
मेरे पास करुणा की एक बूँद नहीं |
इस भवसागर को कैसे पार करूंगा ?
मेरे पास तो कोई भी नाव नहीं ||

प्रभु,तुम तो एक अगोचर हो,
तुम्हारा तो कोई छोर नहीं |
तुम को मै कैसे ढूढूगा अब,
मेरी तो कोई अब बिसात नहीं ||

प्रभु,जब तुम मेरे मात पिता हो,
फिर लालन पोषण की फ़िक्र नहीं |
पर जब मै मात पिता बन जाता हूँ,
बच्चे करते मात पिता की कद्र नहीं ||

प्रभु,जो तुझको याद करता है,
जीवन में अच्छे फल पाता है |
मैंने कभी याद नहीं किया तुमको,
फिर भी अच्छे फल मै पाता हूँ ||

प्रभु तुम तो सबके अन्तर्यामी हो ,
पल पल की बातो को जानते हो |
फिर भी हर बात छिपाता तुमसे ,
पर हर मेरी बात को मानते हो ||

प्रभु,तन मन धन सब कुछ तेरा है ,
फिर मै क्यों कहता हूँ यह मेरा है |
फिर तुझ को क्यों अर्पण करता हूँ ?
जब सारा संसार बनाया ही तेरा है ||

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम (हरियाणा)
Logged
Pages: [1]
Print
Jump to:  


Get Yoindia Updates in Email.

Enter your email address:

Ask any question to expert on eTI community..
Welcome, Guest. Please login or register.
Did you miss your activation email?
November 14, 2019, 05:05:03 AM

Login with username, password and session length
Recent Replies
[November 14, 2019, 02:31:15 AM]

[November 14, 2019, 01:53:40 AM]

[November 13, 2019, 10:24:24 PM]

[November 13, 2019, 10:13:12 PM]

[November 13, 2019, 10:12:39 PM]

[November 13, 2019, 10:11:51 PM]

[November 13, 2019, 10:11:18 PM]

[November 13, 2019, 10:10:34 PM]

[November 13, 2019, 10:09:55 PM]

[November 13, 2019, 10:07:30 PM]
Yoindia Shayariadab Copyright © MGCyber Group All Rights Reserved
Terms of Use| Privacy Policy Powered by PHP MySQL SMF© Simple Machines LLC
Page created in 0.152 seconds with 25 queries.
[x] Join now community of 48404 Real Poets and poetry admirer