चाह है तेरे दरबार में आने की --आर के रस्तोगी

by Ram Krishan Rastogi on May 10, 2019, 11:14:51 AM
Pages: [1]
ReplyPrint
Author  (Read 144 times)
Ram Krishan Rastogi
Yoindian Shayar
******

Rau: 62
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
28 days, 1 hours and 49 minutes.

Posts: 4194
Member Since: Oct 2010


View Profile
Reply with quote
चाह नहीं अब कुछ खाने की |
चाह नहीं अब और कमाने की ||
चाह बस केवल प्रभु जी मेरी |
तेरे ही दरबार में बस आने की ||

चाह नहीं अब किसी खजाने की |
चाह नहीं अब मकान बनाने की ||
करो प्रभुजी आदेश तुम यम को
मुझको अपने दरबार बुलाने की ||

हर चाह को मैंने त्याग दिया |
रिश्ते नातो को  त्याग दिया ||
क्यों कर रहे हो प्रभुजी देरी ?
क्या मेर समय नहीं हुआ ||

कब होगा मिलन तुमसे मेरा ?
दिखता है चारो तरफ अँधेरा ||
क्यों नहीं तुम पास बुलाते ?
क्या कसूर है प्रभु अब मेरा ||

सुबह शाम तुझको याद करता |
फिर भी मेरा मन नहीं भरता ||
कैसे बिसराऊ मै अब तुझको |
क्यों नहीं बुलाने का आदेश करते ?

किसी चाह की कोई चाह नहीं |
अपनों से मिलने का मोह नहीं ||
चाह मोह को मैंने त्याग दिया |
फिर भी तुम मुझको बुलाते नहीं ||

गीत गाता हूँ तेरे सदा मै |
भजनों को भज लेता हूँ मै ||
मै से मै को निकाला मैंने |
आने को अब लालायित मै ||

आर के रस्तोगी
मो 9971006425
 
Logged
MANOJ6568
Khaas Shayar
**

Rau: 28
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
38 days, 17 hours and 45 minutes.

Astrologer & Shayer

Posts: 10037
Member Since: Feb 2010


View Profile
«Reply #1 on: May 11, 2019, 09:09:49 AM »
Reply with quote
चाह नहीं अब कुछ खाने की |
चाह नहीं अब और कमाने की ||
चाह बस केवल प्रभु जी मेरी |
तेरे ही दरबार में बस आने की ||

चाह नहीं अब किसी खजाने की |
चाह नहीं अब मकान बनाने की ||
करो प्रभुजी आदेश तुम यम को
मुझको अपने दरबार बुलाने की ||

हर चाह को मैंने त्याग दिया |
रिश्ते नातो को  त्याग दिया ||
क्यों कर रहे हो प्रभुजी देरी ?
क्या मेर समय नहीं हुआ ||

कब होगा मिलन तुमसे मेरा ?
दिखता है चारो तरफ अँधेरा ||
क्यों नहीं तुम पास बुलाते ?
क्या कसूर है प्रभु अब मेरा ||

सुबह शाम तुझको याद करता |
फिर भी मेरा मन नहीं भरता ||
कैसे बिसराऊ मै अब तुझको |
क्यों नहीं बुलाने का आदेश करते ?

किसी चाह की कोई चाह नहीं |
अपनों से मिलने का मोह नहीं ||
चाह मोह को मैंने त्याग दिया |
फिर भी तुम मुझको बुलाते नहीं ||

गीत गाता हूँ तेरे सदा मै |
भजनों को भज लेता हूँ मै ||
मै से मै को निकाला मैंने |
आने को अब लालायित मै ||

आर के रस्तोगी
मो 9971006425
 

gd
Logged
Ram Krishan Rastogi
Yoindian Shayar
******

Rau: 62
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
28 days, 1 hours and 49 minutes.

Posts: 4194
Member Since: Oct 2010


View Profile
«Reply #2 on: May 11, 2019, 01:22:36 PM »
Reply with quote
मनोज जी धन्यवाद
Logged
Pages: [1]
ReplyPrint
Jump to:  

+ Quick Reply
With a Quick-Reply you can use bulletin board code and smileys as you would in a normal post, but much more conveniently.


Get Yoindia Updates in Email.

Enter your email address:

Ask any question to expert on eTI community..
Welcome, Guest. Please login or register.
Did you miss your activation email?
February 23, 2020, 07:49:42 AM

Login with username, password and session length
Recent Replies
[February 23, 2020, 07:05:42 AM]

[February 23, 2020, 03:01:15 AM]

[February 23, 2020, 03:00:06 AM]

[February 23, 2020, 02:59:20 AM]

[February 23, 2020, 02:58:10 AM]

[February 23, 2020, 02:57:35 AM]

[February 23, 2020, 02:31:41 AM]

[February 22, 2020, 10:43:00 PM]

[February 22, 2020, 10:40:00 PM]

[February 22, 2020, 10:39:28 PM]
Yoindia Shayariadab Copyright © MGCyber Group All Rights Reserved
Terms of Use| Privacy Policy Powered by PHP MySQL SMF© Simple Machines LLC
Page created in 0.156 seconds with 24 queries.
[x] Join now community of 48456 Real Poets and poetry admirer