ज्येष्ठ की भरी दोपहरी ---आर के रस्तोगी

by Ram Krishan Rastogi on May 28, 2019, 07:09:33 PM
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ज्येष्ठ माह की दोपहरी :
           --------------------------
देख दोपहरी ज्येष्ठ की,गर्म हो गया गात |
झुलस रहे है सब पेड़ो के नये कोमल पात ||

छाया भी छाया मांग रही ,है बड़ी बैचेन |
छाया को छाया मिल जाये तब आये चैन ||

प्यासा पथिक पूछ रहा है कहाँ मिलेगा नीर |
एक पग चलना है मुश्किल हो रहा वह अधीर ||

सूख गये है सभी सरोवर,मांग रहे है सब जल |
कर रहे विनती वरुण देव से दे दो हम को जल ||

प्यासे पशु पक्षी ढूँढ रहे है मिल जाये उनको पानी |
चारो तरफ निगाहें दौड़ा रहे दिखाई दे कही पानी ||

दिन बडे हो गये है ,छोटी हो गयी है रात |
ऐसी छोटी रात में कैसे होगी पूरी बात ||

गर्म गर्म लू ऐसे चल रही,जैसे शोलो की बारात |
इस ज्येष्ठ माह की दोपहरी,में हो रहे है आघात

आर के रस्तोगी
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«Reply #1 on: May 28, 2019, 09:41:06 PM »
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ज्येष्ठ माह की दोपहरी :
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देख दोपहरी ज्येष्ठ की,गर्म हो गया गात |
झुलस रहे है सब पेड़ो के नये कोमल पात ||

छाया भी छाया मांग रही ,है बड़ी बैचेन |
छाया को छाया मिल जाये तब आये चैन ||

प्यासा पथिक पूछ रहा है कहाँ मिलेगा नीर |
एक पग चलना है मुश्किल हो रहा वह अधीर ||

सूख गये है सभी सरोवर,मांग रहे है सब जल |
कर रहे विनती वरुण देव से दे दो हम को जल ||

प्यासे पशु पक्षी ढूँढ रहे है मिल जाये उनको पानी |
चारो तरफ निगाहें दौड़ा रहे दिखाई दे कही पानी ||

दिन बडे हो गये है ,छोटी हो गयी है रात |
ऐसी छोटी रात में कैसे होगी पूरी बात ||

गर्म गर्म लू ऐसे चल रही,जैसे शोलो की बारात |
इस ज्येष्ठ माह की दोपहरी,में हो रहे है आघात

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Ati sundar kyaa baat hai.
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«Reply #2 on: May 29, 2019, 01:55:52 AM »
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ज्येष्ठ माह की दोपहरी :
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देख दोपहरी ज्येष्ठ की,गर्म हो गया गात |
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«Reply #3 on: May 29, 2019, 11:22:09 AM »
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श्री सुरेन्द्रन जी धन्यवाद
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«Reply #4 on: May 29, 2019, 11:23:26 AM »
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श्री मनोज जी शुक्रिया
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+ Quick Reply
With a Quick-Reply you can use bulletin board code and smileys as you would in a normal post, but much more conveniently.


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