मां शैलपुत्री

by nandbahu on October 07, 2021, 07:12:37 AM
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nandbahu
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दुर्गा मां के नौ है स्वरूप,
जिनमे प्रथम शैलपुत्री रूप।
पूर्वजन्म थी दक्ष कन्या,
अपमानित हुई बाबुल के अंगना।
हवन कुंड में सती हुई,
अगले जन्म शैलराज घर जन्मी।
पर्वतराज हिमालय की पुत्री,
कहलाई वही मां शैलपुत्री।
प्रथम नवरात्र दिन पूजी जाए,
उपासना पूजा से साधी जाए।
योगी की योग साधना का आरम्भ,
करे मन को मूलाधार चक्र स्थित।
सवारी जिनकी बनी  वृषभ,
दांये हाथ त्रिशूल बांये हाथ कमल पुष्प।
पार्वती हेमवती भी इनके नाम,
हेमवती स्वरूप से किया देवो का भंजन।
मस्तक पर अर्ध चन्द्र सुशोभित,
साधक स्वंय को करें समर्पित।
शिवजी की अर्द्धांगिनी बनी,
अनंता है माँ शैलपुत्री की शक्ति।
सच्चे मन से जो करे भक्ति,
चन्द्रदोष से मिलती मुक्ति।
कृपा बरसाये  दे भक्त को रिद्धि सिद्धि,
मां शैलपुत्री की चहुँलोक प्रसिद्धि।
नमो नमो मां शैलपुत्री नमो,
शरणागत हम मां नमो नमो।

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