मैं वो श्रमिक हूँ

by nandbahu on May 02, 2022, 06:29:47 AM
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जो शिलाएं तोड़ता
जिंदगी को गढ़ता
नदियों की धाराओं को
मोड़ने की क्षमता रखता
मैं वो श्रमिक हूँ, हाँ मैं वो श्रमिक हूँ।

खदानें खोदता
भूगर्भ में जा पहुंचता
तत्वों को वसुंधरा की
सतह में ला देता
मैं वो श्रमिक हूँ, हाँ मैं वो श्रमिक हूँ।

युद्धों की नियति को
हथियार गढ़ के मोड़ता
कुरुक्षेत्र में महाभारत
का फैसला करा देता
मैं वो श्रमिक हूँ, हाँ मैं वो श्रमिक हूँ।

ऊंचे भवन अट्टालिकाओं की
नींव से गगनचुंबी तक
पहुंचाने में पसीने की
निज बूंद से है सींचता
मैं वो श्रमिक हूँ, हाँ मैं वो श्रमिक हूँ।

प्रलय की सीमाओं को
निज हाथों से है बांधता
जमीन से पाताल तक
कैलाश को है साधता
मैं वो श्रमिक हूँ, हाँ मैं वो श्रमिक हूँ।

स्वंय पैबंद में रहकर
लोभ स्वार्थ के बिना
धनवानों के स्वप्नों को
मूर्त रूप देता
मैं वो श्रमिक हूँ, हाँ मैं वो श्रमिक हूँ।

फावड़ा कुदाल ले
टोकरी सर पे उठा
नित्य कर्मपथ पर
नव आशाओं से है तकता
मैं वो श्रमिक हूँ, हाँ मैं वो श्रमिक हूँ।
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