मैं कही भी नहीं हूँ

by Rajnish.raaj on June 01, 2019, 11:59:30 AM
Pages: [1]
ReplyPrint
Author  (Read 66 times)
Rajnish.raaj
Shayari Qadrdaan
***

Rau: 9
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
1 days, 19 hours and 40 minutes.
Posts: 187
Member Since: Feb 2013


View Profile WWW
Reply with quote
जाने कब से मैं सिर्फ़ अपने आप को ढूँढता रहा ,
अपने बिखेर जज़्बातों को लफ़्ज़ों में समेटता रहा।

कहाँ - कहाँ नहीं ख़ुद को ढूँढा मैंने

कभी पुरानी डायरी के पन्नो में
कहीं कुछ बिखेर काग़ज़ के टूकरो में
कभी उन बचपन की गलियों में
कभी एक उदास सी शाम में

फिर भी मैं खोया सा रहा
मैं जगा और ये जहाँ सोया सा रहा

फिर ढूँढने चला अपने लिए नींद मैं
ख़ुद को सम्हालने के लिए उम्मीद लिए
कुछ खट्टे मीठे यादों में डूबते हुए
फिर से एक बार खो गया मैं

क्या करूँ

ख़ुद से जंग जो जितना था मुझे
या फिर शायद हारना था मुझे
चलता रहा जंग दिल ओ दिमाग़ में
थोड़ा और जो टूट के बिखरना था मुझे

कुछ अपने अरमान के लिए
कुछ झूठे शान के लिए
यहाँ तक अपने ही नाम के लिए
कुछ लोगों के एहसान के लिए।


इन सब के बीच मैं कही भी नहीं था

थी कुछ लोगों की ख़्वाहिशें
कुछ उनकी अपनी ज़रूरतें
मैं क्या सोचता हूँ इस से कोई फ़र्क़ नहीं साहब
हर एक दिन जैसे मेरे लिये आज़माइशें

लोग ख़ुश हो जाएँगे मुझे बिखरता देख कर
अपने ख़्वाहिशों को मुझ से संवरता देख कर
और मैं यूँ ही जल जल के मुस्कुराता रहूँगा
हौले हौले से ख़ुद को मिटाता रहूँगा


और एक दिन वो बहुत ख़ुश हो जाएँगे



Logged
surindarn
Mashhur Shayar
***

Rau: 258
Offline Offline

Waqt Bitaya:
93 days, 20 hours and 28 minutes.
Posts: 19360
Member Since: Mar 2012


View Profile
«Reply #1 on: June 02, 2019, 12:04:02 AM »
Reply with quote
जाने कब से मैं सिर्फ़ अपने आप को ढूँढता रहा ,
अपने बिखेर जज़्बातों को लफ़्ज़ों में समेटता रहा।

कहाँ - कहाँ नहीं ख़ुद को ढूँढा मैंने

कभी पुरानी डायरी के पन्नो में
कहीं कुछ बिखेर काग़ज़ के टूकरो में
कभी उन बचपन की गलियों में
कभी एक उदास सी शाम में

फिर भी मैं खोया सा रहा
मैं जगा और ये जहाँ सोया सा रहा

फिर ढूँढने चला अपने लिए नींद मैं
ख़ुद को सम्हालने के लिए उम्मीद लिए
कुछ खट्टे मीठे यादों में डूबते हुए
फिर से एक बार खो गया मैं

क्या करूँ

ख़ुद से जंग जो जितना था मुझे
या फिर शायद हारना था मुझे
चलता रहा जंग दिल ओ दिमाग़ में
थोड़ा और जो टूट के बिखरना था मुझे

कुछ अपने अरमान के लिए
कुछ झूठे शान के लिए
यहाँ तक अपने ही नाम के लिए
कुछ लोगों के एहसान के लिए।


इन सब के बीच मैं कही भी नहीं था

थी कुछ लोगों की ख़्वाहिशें
कुछ उनकी अपनी ज़रूरतें
मैं क्या सोचता हूँ इस से कोई फ़र्क़ नहीं साहब
हर एक दिन जैसे मेरे लिये आज़माइशें

लोग ख़ुश हो जाएँगे मुझे बिखरता देख कर
अपने ख़्वाहिशों को मुझ से संवरता देख कर
और मैं यूँ ही जल जल के मुस्कुराता रहूँगा
हौले हौले से ख़ुद को मिटाता रहूँगा


और एक दिन वो बहुत ख़ुश हो जाएँगे


Aap ne achhaa likhaa hai achhaa ehsaas hai, Dheron daad. Khud se mulaakaat kee hai, kuchh lambi mulaakaat kee hai, Apnaa bojj bharhaane kee hee baat kee hai.
 Applause Clapping Smiley Applause Clapping Smiley Applause Clapping Smiley Applause Clapping Smiley Applause
Logged
Rustum Rangila
Yoindian Shayar
******

Rau: 84
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
9 days, 12 hours and 5 minutes.

Posts: 2145
Member Since: Oct 2015


View Profile
«Reply #2 on: June 11, 2019, 02:38:19 PM »
Reply with quote
Wah wah wah Applause Applause Applause Applause Applause
Logged
khwahish
WeCare
Khaas Shayar
**

Rau: 166
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
271 days, 19 hours and 29 minutes.

Posts: 11812
Member Since: Sep 2006


View Profile
«Reply #3 on: June 15, 2019, 04:07:18 PM »
Reply with quote
जाने कब से मैं सिर्फ़ अपने आप को ढूँढता रहा ,
अपने बिखेर जज़्बातों को लफ़्ज़ों में समेटता रहा।

कहाँ - कहाँ नहीं ख़ुद को ढूँढा मैंने

कभी पुरानी डायरी के पन्नो में
कहीं कुछ बिखेर काग़ज़ के टूकरो में
कभी उन बचपन की गलियों में
कभी एक उदास सी शाम में

फिर भी मैं खोया सा रहा
मैं जगा और ये जहाँ सोया सा रहा

फिर ढूँढने चला अपने लिए नींद मैं
ख़ुद को सम्हालने के लिए उम्मीद लिए
कुछ खट्टे मीठे यादों में डूबते हुए
फिर से एक बार खो गया मैं

क्या करूँ

ख़ुद से जंग जो जितना था मुझे
या फिर शायद हारना था मुझे
चलता रहा जंग दिल ओ दिमाग़ में
थोड़ा और जो टूट के बिखरना था मुझे

कुछ अपने अरमान के लिए
कुछ झूठे शान के लिए
यहाँ तक अपने ही नाम के लिए
कुछ लोगों के एहसान के लिए।


इन सब के बीच मैं कही भी नहीं था

थी कुछ लोगों की ख़्वाहिशें
कुछ उनकी अपनी ज़रूरतें
मैं क्या सोचता हूँ इस से कोई फ़र्क़ नहीं साहब
हर एक दिन जैसे मेरे लिये आज़माइशें

लोग ख़ुश हो जाएँगे मुझे बिखरता देख कर
अपने ख़्वाहिशों को मुझ से संवरता देख कर
और मैं यूँ ही जल जल के मुस्कुराता रहूँगा
हौले हौले से ख़ुद को मिटाता रहूँगा


और एक दिन वो बहुत ख़ुश हो जाएँगे






Bahut Bahut Aur Bahut Khooob...!!!!!

Zindagi Se Juude Jazbaat...Kuch Aap Beeti,Kuch Jug Beeti... Umda Bayaani....


 Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley
Logged
Pages: [1]
ReplyPrint
Jump to:  

+ Quick Reply
With a Quick-Reply you can use bulletin board code and smileys as you would in a normal post, but much more conveniently.


Get Yoindia Updates in Email.

Enter your email address:

Ask any question to expert on eTI community..
Welcome, Guest. Please login or register.
Did you miss your activation email?
June 16, 2019, 07:23:05 AM

Login with username, password and session length
Recent Replies
[June 16, 2019, 06:26:04 AM]

[June 16, 2019, 04:57:55 AM]

[June 15, 2019, 11:29:50 PM]

[June 15, 2019, 11:25:25 PM]

[June 15, 2019, 11:23:47 PM]

[June 15, 2019, 10:56:29 PM]

[June 15, 2019, 10:48:23 PM]

[June 15, 2019, 04:07:18 PM]

by Mohd Kaif
[June 15, 2019, 03:54:10 PM]

by Mohd Kaif
[June 15, 2019, 03:46:12 PM]
Yoindia Shayariadab Copyright © MGCyber Group All Rights Reserved
Terms of Use| Privacy Policy Powered by PHP MySQL SMF© Simple Machines LLC
Page created in 0.169 seconds with 24 queries.
[x] Join now community of 48363 Real Poets and poetry admirer