कब तक (CSET)

by MANOJ6568 on October 19, 2018, 05:53:29 AM
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कब तक करोगे मेरे *पुतले का दहन
नफरत तुम्हारी अब होती नहीं सहन

बुराई का चोला वक़्त ने मुझको था पहनाया
मैं अपने एक कर्म  से आज तक हु पछताया
सरूपनखा का भाई कुदरत ने मुझको बनाया
ख़ामख़ा  उसकी झूठी बातो में मैं था आया
अपमान सहन मैं अपनी बहन का न कर  पाया
गुस्से में  पर नारी को घर में मैं उठा कर लाया
उस  नारी को मैंने मगर हाथ तक न लगाया
गुणगान मेरी  शराफत का किसी ने न गाया
अपने एक कर्म से मैं  आज तक हु पछताया


सीता को खोजते -२ दल राम का जब है आया
राम ने युद्ध से पहले मन पूजा का था  बनाया
मुझ पंडित को लंका से रामेश्वरम में बुलवाया
मैंने भी अपना ब्राह्मण धर्म बाखूब निभाया
विधि विधान से पूजा को सम्पन  करवाया
कुल्हाड़ी अपनी जीत पर खुद मार आया
आते आते विजई भव का आशीर्वाद दे आया
धर्म से मैंने पाँव पीछे नहीं हैकभी  हटाया
अपने एक कर्म से मैं  आज तक हु पछताया  

*मेरे शब्द का यहाँ रावण का सम्बोधन है

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«Reply #1 on: October 19, 2018, 03:32:28 PM »
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कब तक करोगे मेरे *पुतले का दहन
नफरत तुम्हारी अब होती नहीं सहन

बुराई का चोला वक़्त ने मुझको था पहनाया
मैं अपने एक कर्म  से आज तक हु पछताया
सरूपनखा का भाई कुदरत ने मुझको बनाया
ख़ामख़ा  उसकी झूठी बातो में मैं था आया
अपमान सहन मैं अपनी बहन का न कर  पाया
गुस्से में  पर नारी को घर में मैं उठा कर लाया
उस  नारी को मैंने मगर हाथ तक न लगाया
गुणगान मेरी  शराफत का किसी ने न गाया
अपने एक कर्म से मैं  आज तक हु पछताया


सीता को खोजते -२ दल राम का जब है आया
राम ने युद्ध से पहले मन पूजा का था  बनाया
मुझ पंडित को लंका से रामेश्वरम में बुलवाया
मैंने भी अपना ब्राह्मण धर्म बाखूब निभाया
विधि विधान से पूजा को सम्पन  करवाया
कुल्हाड़ी अपनी जीत पर खुद मार आया
आते आते विजई भव का आशीर्वाद दे आया
धर्म से मैंने पाँव पीछे नहीं हैकभी  हटाया
अपने एक कर्म से मैं  आज तक हु पछताया  

*मेरे शब्द का यहाँ रावण का सम्बोधन है


waah waah bahut khoobsurat ehsaas hai, iss ehsaas ke liye Rau ke saath daad.
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«Reply #2 on: October 19, 2018, 09:24:04 PM »
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