घटाओ का व बिजली में वार्तालाप --आर के रस्तोगी

by Ram Krishan Rastogi on May 06, 2018, 03:26:53 PM
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घनघोर घटाओ से,बिजली आज यू बोली
बहन कहाँ जा रही हो,मुझे छोड़ अकेली ?
मै तो साथ रहती हूँ,हमेशा तुम्हारे साथ
क्या मै नहीं अब तुम्हारी प्यारी सहेली ?

बिजली की सुन बाते,घनघोर घटाये बोली
हम जा रहे विरहणी के पास जो है अकेली
प्रियतम उसके पास नहीं,जो अब है अकेली
अगर ले जाते है तुझे,तेरी गर्जना से डर जायेगी
अपने प्रियतम के गम में, वह यूही मर जायेगी

तुम तो बहुत गरजती हो,अगर तुम गिर जाओगी
मृत्यु को वह प्राप्त होगी,भस्म तुरन्त हो जायेगी
प्रियतम जब उसका आयेगा उसको क्या उत्तर देगे ?
कलंक हमारे ऊपर लगेगा,कोई न हमे माफ़ करेगा

अपनी प्रेमिका को मरा देख,वह श्राप हमको देगा
"तुमको तुम्हारा प्रियतम न मिलेगा भाग्य फूटा होगा"
इसी बात के कारण, हम तुमको साथ नहीं ले जाती
पक्की हो  हमारी सहेली,वरना तुमको साथ ले जाती

घनघोर घटाओ की सुन बात,बिजली उनसे यू बोली
वैसे तो तुम कहती हो सहेली,क्यों छोड़ती हो अकेली ?
मै तो हूँ पक्की सहेली तुम्हारी,फर्ज अपना निभाऊगी
जहा तुम्हे दिखाई न देगा,वहाँ रास्ता तुम्हे दिखाऊगी

भले ही मै कडकती,अपनी चमक से रास्ता सबको दिखाती
घनघोर घटाओ से हो जाता अँधेरा रास्ता मै सबको दिखाती
मत छोडो बहन मुझे अकेला,वरना मै भी यहाँ मर जाउंगी
एक से एक मिलकर ग्यारह होते,ताकत तुम्हारी बन जाउंगी

बिजली की सुन तर्क की बाते,घनघोर घटाये उसको ले चलती है
इसी तरह एक विरहणी की दो बहिने,उसकी पीड़ा को हरती है  
अगर सोच तुम्हारी है अच्छी ,दुखियो के दुःख निबट जाते है
ये तो था विरहणी का दुःख,बड़े बड़े दुःख सबके दूर हो जाते है

आर के रस्तोगी    
 
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«Reply #1 on: May 06, 2018, 07:49:11 PM »
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waah waah bahut sundar.
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Ram Krishan Rastogi
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«Reply #2 on: May 07, 2018, 02:28:23 PM »
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[size=10ptश्री सुरिन्द्रण जी शुक्रिया  [/size]
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