नए सपने देखेगा तू

by nandbahu on August 12, 2012, 06:08:30 AM
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nandbahu
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विरह वेदना मन की आज
थाह न पाये कोई आज

उमंगें स्थिर खड़ी द्वारे पे
आशाएं खड़ी चौराहे पे

जलता हुआ दिया भी आज
पूछे मुझसे बार बार

लौ मेरी कम क्यों हो गयी
बाती मेरी बदली क्यों गयी
 
अँधेरा मेरे तले ही तो था
रोशन होता कोना कोना तो था

आंसू मेरे बह गए आज
मन में बाढ़ आयी है आज

विचारों के जंगल में घूमे
कांटें भरे पथ मुझको मिले

फूल भी  चुभते हैं तन में
सीमा संकुचित बैठी है उसमें
 
पापी मन तू क्यों न माने
क्यों इस सत्य को न पहचाने

वास्तविकता की चादर को ओढ़ ले तू
जीवन को व्यर्थ न गवां तू

फूल कांटे सब ही मिलते हैं
कीचड़ में ही कमल खिलते हैं
 
दुःख के बाद ख़ुशी आएगी
अंतर्मन को आज मना ले

पहले दुःख को जान ले तू
ख़ुशी बाद में मनाना तू

बसन्त बहार भी आयेगी
डाली डाली झूम  उठेगी

कोयल जब कूक सुनाएगी
मिलन का निमंत्रण ही देगी

बचपन की यादें न होंगी
जवानी की सारी उमंगें होंगी
 
सब कुछ पीछे छोड़ के तू
नए सपने देखेगा तू

देहरी वोह लाँघ के अपनी
तन मन से बनेगी तेरी

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MANOJ6568
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«Reply #1 on: August 12, 2012, 09:54:21 AM »
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khub
विरह वेदना मन की आज
थाह न पाये कोई आज

उमंगें स्थिर खड़ी द्वारे पे
आशाएं खड़ी चौराहे पे

जलता हुआ दिया भी आज
पूछे मुझसे बार बार

लौ मेरी कम क्यों हो गयी
बाती मेरी बदली क्यों गयी
 
अँधेरा मेरे तले ही तो था
रोशन होता कोना कोना तो था

आंसू मेरे बह गए आज
मन में बाढ़ आयी है आज

विचारों के जंगल में घूमे
कांटें भरे पथ मुझको मिले

फूल भी  चुभते हैं तन में
सीमा संकुचित बैठी है उसमें
 
पापी मन तू क्यों न माने
क्यों इस सत्य को न पहचाने

वास्तविकता की चादर को ओढ़ ले तू
जीवन को व्यर्थ न गवां तू

फूल कांटे सब ही मिलते हैं
कीचड़ में ही कमल खिलते हैं
 
दुःख के बाद ख़ुशी आएगी
अंतर्मन को आज मना ले

पहले दुःख को जान ले तू
ख़ुशी बाद में मनाना तू

बसन्त बहार भी आयेगी
डाली डाली झूम  उठेगी

कोयल जब कूक सुनाएगी
मिलन का निमंत्रण ही देगी

बचपन की यादें न होंगी
जवानी की सारी उमंगें होंगी
 
सब कुछ पीछे छोड़ के तू
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Mohammad Touhid
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«Reply #2 on: August 12, 2012, 12:39:33 PM »
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mind blowing... bahut khoob nadbahu ji.. Usual Smile
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«Reply #3 on: August 12, 2012, 02:08:34 PM »
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nandbahu
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«Reply #4 on: August 13, 2012, 05:38:54 AM »
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thanx manoj ji
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nandbahu
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«Reply #5 on: August 13, 2012, 05:39:44 AM »
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«Reply #6 on: August 13, 2012, 05:40:36 AM »
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kalam k chalne ko zamaana paagalpan samajhta hai.

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«Reply #7 on: August 13, 2012, 05:04:56 PM »
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Applause Applause Applause Applause Applause  bahut sundar, bahut bahut khoob likha hai aapne Nandbahu ji....!!!
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