कैसे कटी वो सर्दी की ठंडी रात

by Ram Krishan Rastogi on December 23, 2014, 09:22:16 AM
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कैसे कटी,कैसे बताऊ वो सर्दी की ठंडी रात
पिया बिन कैसे कटे वो सर्दी की अँधेरी रात

टेम्प्रेचर मायनस चार था हो रही थी जोर से बरसात
मै अकेली थी बिस्तर पर ,किससे कहूँ मन की बात

बदन कपकपा रहा था कहाँ से और कम्बल लाऊ
अँधेरी रात में पिया बिन मन को कैसे समझाऊ

करवटे बदल बदल कर मै काट रही थी ये ठंडी रात
पिया बिन कैसे कटे,वो सर्दी से भरी अँधेरी  रात


ठन्डी बर्फीली हवाएं चल रही थी,मन था बड़ा उदास
ऐसे में मेरे पिया पास होते,बुझ जाती दिल की प्यास
कैसे बुझाऊँ,कैसे समझाऊँ दिल को जब पिया न हो पास
करते करते इन्तजार उनकी,टूट गई थी मेरी  तब आस
गरज रहे थे बादल आसमां में बिजली भी थी चमक रही
बादलो की गडगडाहट सुनते ही,मै डर रही थी उस रात
पिया बिन कैसे कटे,वो सर्दी की बर्फीली अँधेरी  रात  

तन झटका था,मन भटका था,दिल तडफ रहा था मेरा
कैसे करू उपचार अब,दिमाग काम कर रहा न था मेरा
जुल्फे मेरी बिखरी थी ,गजरा भी मुरझाया था मेरा
बालो को मै नोच रही थी,पागलो जैसा हाल था मेरा
कैसे मै अपने को सभालूँ,अब होने वाला था सबेरा
कैसे छिपाऊ इस हालत को,पर पड़ोसी समझ गये थे बात
कैसे कटी,कैसे बताऊ,वो सर्दी की बर्फीली अन्धेरी रात


आर के रस्तोगी  
 








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qalb
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«Reply #1 on: December 23, 2014, 12:11:28 PM »
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कैसे कटी,कैसे बताऊ वो सर्दी की ठंडी रात
पिया बिन कैसे कटे वो सर्दी की अँधेरी रात

टेम्प्रेचर मायनस चार था हो रही थी बरसात
मै अकेली थी बिस्तर पर,किससे कहूँ मन की बात

बदन कपकपा रहा था कहाँ से और कम्बल लाऊ
अँधेरी रात में पिया बिन मन को कैसे समझाऊ

करवटे बदल बदल कर मै काट रही थी ये ठंडी रात
पिया बिन कैसे कटे,वो सर्दी की अँधेरी रात



boss!!!!!!!!!!!


main ne ek baat notice kee hai. aap apne poem me.N ladkee kaa charecter hee nibhaate ho aisaa kyon.


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«Reply #2 on: December 23, 2014, 01:23:40 PM »
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श्री Qalb साहिब, ये बात आपकी बिल्कुल सही है कि अक्सर मै नारी अथवा औरत के बारे में लिखता हूँ |मैने उसकी पीड़ा,वेदना और विरह को नजदीक से देखा और समझा है |कवि या शायर जो भी समाज में और अपने आस पास जो देखता उसी का चित्रण अपनी कविताओ या शायरी में करता है|इस सम्बन्ध में कुछ पंक्तिया पेश है:-

मर्दों के बारे में सब लिखत है,औरतो के बारे में लिखे न कोय
औरतो के बारे में जो लिखत है,वह उसकी पीड़ा तुरंत हर लेय
उसकी पीड़ा तुरंत हर लेय,वह उसकी वेदना को तुरंत समझता
नारी ने नर को जन्म दिया है वह उसके प्रसव- पीड़ा समझता 
कह रस्तोगी कविराय,सुनो भई लेखको और  शायर बन्धु
नारी के बारे में लिखो,जो धुल जाये उसके दुःख का सिन्धु

आर के रस्तोगी  
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«Reply #3 on: December 23, 2014, 08:05:41 PM »
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«Reply #4 on: December 23, 2014, 11:15:43 PM »
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aapka bhut baut shukrya
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surindarn
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«Reply #5 on: December 24, 2014, 07:46:18 AM »
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nihaayat umdah ehsaas hai aapkaa aurton ke prate, dheron daad.
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Ram Krishan Rastogi
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«Reply #6 on: December 24, 2014, 10:09:38 AM »
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श्री सुरिन्द्र्ण जी, आपका बहुत बहुत शुक्रया हौशला अफजाई के लिए और मेरी रचना के लिए|उम्मीद है आप भविष में भी मेरा हौशला बढायेगे ताकि मै और अच्छी रचना लिख सकू आर के रस्तोगी
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sanchit
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«Reply #7 on: December 24, 2014, 12:56:05 PM »
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With a Quick-Reply you can use bulletin board code and smileys as you would in a normal post, but much more conveniently.


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