कितना प्यार करती है तुमको --आर के रसोगी

by Ram Krishan Rastogi on June 19, 2018, 11:59:54 AM
Pages: [1]
ReplyPrint
Author  (Read 191 times)
Ram Krishan Rastogi
Yoindian Shayar
******

Rau: 62
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
28 days, 1 hours and 49 minutes.

Posts: 4194
Member Since: Oct 2010


View Profile
Reply with quote
कितना प्यार करती हूँ तुमको
शायद तुम ये जानते नहीं
दूर रहकर भी कितने पास हूँ
क्यों तुम ये मानते नहीं ?


तुम मेरे सूर्य देव हो,मै किरण हूँ तुम्हारी
दिन निकलते ही साथ चलती हूँ तुम्हारे
सुबह जो सुनते हो पक्षियों की चहचहाट
मै ही तो गुनगुनाती हूँ कान में तुम्हारे

उपवन में जो तुम देखते हो कलियाँ
आगमन पर बनती हूँ फूल लिये तुम्हारे  
बंद रक्खा था जब साथ सोये थे मेरे
आजाद किया था तुम्हे उठते तुम्हारे

सुबह जो सूंघते है वो गंध हे मेरी
सुबह जो चलती है वायु  तो मेरी
मंद समीर के झोके जब चलते
आँखे मूँद लेती हूँ चलते चलते

ऊपर से गिरी है जब बूँद एक नीचे
समझ न लेना ये बादल वाली  बूंदे
होते है वे मेरे प्यार के आँसू
जो टपकते है बनकर प्यार की बूंदे

होते हो जब दोपहर गगन बीच तुम
चारो तरफ अग्नि फैलाते हो तुम
उसको और कुछ समझना ना तुम
वह प्यार की अग्न है लगाते हो तुम

शाम को जब पश्चिम में अस्त हो तुम
साथ में ही तो छिप जाते हम और तुम
इसका दूसरा अर्थ निकाले न ये दुनिया
दिन की थकान मिटाते हम और तुम  


आर के रस्तोगी
मो 9971006425  
Logged
surindarn
Sarparast ae Shayari
****

Rau: 259
Offline Offline

Waqt Bitaya:
101 days, 20 hours and 42 minutes.
Posts: 21648
Member Since: Mar 2012


View Profile
«Reply #1 on: June 20, 2018, 02:52:50 AM »
Reply with quote
कितना प्यार करती हूँ तुमको
शायद तुम ये जानते नहीं
दूर रहकर भी कितने पास हूँ
क्यों तुम ये मानते नहीं ?


तुम मेरे सूर्य देव हो,मै किरण हूँ तुम्हारी
दिन निकलते ही साथ चलती हूँ तुम्हारे
सुबह जो सुनते हो पक्षियों की चहचहाट
मै ही तो गुनगुनाती हूँ कान में तुम्हारे

उपवन में जो तुम देखते हो कलियाँ
आगमन पर बनती हूँ फूल लिये तुम्हारे 
बंद रक्खा था जब साथ सोये थे मेरे
आजाद किया था तुम्हे उठते तुम्हारे

सुबह जो सूंघते है वो गंध हे मेरी
सुबह जो चलती है वायु  तो मेरी
मंद समीर के झोके जब चलते
आँखे मूँद लेती हूँ चलते चलते

ऊपर से गिरी है जब बूँद एक नीचे
समझ न लेना ये बादल वाली  बूंदे
होते है वे मेरे प्यार के आँसू
जो टपकते है बनकर प्यार की बूंदे

होते हो जब दोपहर गगन बीच तुम
चारो तरफ अग्नि फैलाते हो तुम
उसको और कुछ समझना ना तुम
वह प्यार की अग्न है लगाते हो तुम

शाम को जब पश्चिम में अस्त हो तुम
साथ में ही तो छिप जाते हम और तुम
इसका दूसरा अर्थ निकाले न ये दुनिया
दिन की थकान मिटाते हम और तुम 


आर के रस्तोगी
मो 9971006425 

waah waah.
 Applause Applause Applause Applause Applause Applause
Logged
Ram Krishan Rastogi
Yoindian Shayar
******

Rau: 62
Offline Offline

Gender: Male
Waqt Bitaya:
28 days, 1 hours and 49 minutes.

Posts: 4194
Member Since: Oct 2010


View Profile
«Reply #2 on: June 20, 2018, 10:14:06 AM »
Reply with quote
Shri Surindran ji shukriya
Logged
Pages: [1]
ReplyPrint
Jump to:  

+ Quick Reply
With a Quick-Reply you can use bulletin board code and smileys as you would in a normal post, but much more conveniently.


Get Yoindia Updates in Email.

Enter your email address:

Ask any question to expert on eTI community..
Welcome, Guest. Please login or register.
Did you miss your activation email?
February 17, 2020, 08:58:01 AM

Login with username, password and session length
Recent Replies
[February 17, 2020, 08:18:26 AM]

[February 17, 2020, 03:30:41 AM]

[February 16, 2020, 11:51:42 PM]

[February 16, 2020, 11:11:22 PM]

[February 16, 2020, 10:40:05 PM]

[February 16, 2020, 10:39:21 PM]

[February 16, 2020, 10:35:57 PM]

[February 16, 2020, 10:34:58 PM]

[February 16, 2020, 10:34:17 PM]

[February 16, 2020, 10:33:21 PM]
Yoindia Shayariadab Copyright © MGCyber Group All Rights Reserved
Terms of Use| Privacy Policy Powered by PHP MySQL SMF© Simple Machines LLC
Page created in 0.153 seconds with 24 queries.
[x] Join now community of 48448 Real Poets and poetry admirer