ham bhi khush the jab wo jeete.

by yati_om on October 04, 2010, 07:03:30 AM
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yati_om
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हम   भी  खुश  थे जब वो जीते, लेना  एक  न देना दो
भाग  रहे   थे  तुम   भी  पीछे,  लेना  एक न देना दो
 
उनको तो  मन्दिर-मस्जिद  से वोट की खेती  करनी थी
हम   आपस   में  लड़ना   सीखे, लेना एक न देना दो

जीना   हमसे   सीख  रहे हैं दुनिया  वाले  लेकिन हम
सीखें    उनके   तौर-तरीक़े,   लेना   एक   न  देना  दो

जब  लाखों  की  भीड़  जुट गई होड़ लगी फिर नारों की  
घुरहू,  रामजतन  भी  चीखे,   लेना   एक  न देना  दो

क्यों   देते  हो  राय सभी को, पूछ रहा  है क्या कोई ?
बोले  मुझसे   मेरे  बेटे,   लेना  एक   न   देना   दो

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khwahish
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«Reply #1 on: October 04, 2010, 07:06:27 AM »
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Bahut Bahut Aur bahut Khoob Yati_om Ji..

Aapne Aaj ke Daur Ki Sachayi bayaan kar Di..

Bahut Ache Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley Clapping Smiley
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yati_om
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«Reply #2 on: October 04, 2010, 07:10:37 AM »
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khwaish ji,ghazal par pratikriya ke liye bahut-bahut dhanyavad.....omprakash yati"
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AbhiTamrakar
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«Reply #3 on: October 04, 2010, 08:39:49 AM »
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yati fir ek bar wah jiii..bhaut khoob likha he ~
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manzil-e-ishq
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«Reply #4 on: October 04, 2010, 10:29:11 AM »
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true words om ji..
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riyaz106
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«Reply #5 on: October 04, 2010, 12:04:31 PM »
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वाह वाह यति जी बहुत अच्छी लगी आपकी ये रचना । आजकल के हालात पर आपने बडी खूबसूरती से लिखा है । दाद हाज़िर है ।
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yati_om
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«Reply #6 on: October 04, 2010, 03:30:00 PM »
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हम   भी  खुश  थे जब वो जीते, लेना  एक  न देना दो
भाग  रहे   थे  तुम   भी  पीछे,  लेना  एक न देना दो
 
उनको तो  मन्दिर-मस्जिद  से वोट की खेती  करनी थी
हम   आपस   में  लड़ना   सीखे, लेना एक न देना दो

जीना   हमसे   सीख  रहे हैं दुनिया  वाले  लेकिन हम
सीखें    उनके   तौर-तरीक़े,   लेना   एक   न  देना  दो

जब  लाखों  की  भीड़  जुट गई होड़ लगी फिर नारों की  
घुरहू,  रामजतन  भी  चीखे,   लेना   एक  न देना  दो

क्यों   देते  हो  राय सभी को, पूछ रहा  है क्या कोई ?
बोले  मुझसे   मेरे  बेटे,   लेना  एक   न   देना   दो


वाह वाह यति जी बहुत अच्छी लगी आपकी ये रचना । आजकल के हालात पर आपने बडी खूबसूरती से लिखा है । दाद हाज़िर है ।
रियाज़ जी,बहुत-बहुत शुक्रिया......"ओमप्रकाश यती"
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«Reply #7 on: October 04, 2010, 07:56:56 PM »
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acchi shayari per tumhari om hum bhi daad dete hai
ye alag baat hai shayeri se mera lena ek na dena do


हम   भी  खुश  थे जब वो जीते, लेना  एक  न देना दो
भाग  रहे   थे  तुम   भी  पीछे,  लेना  एक न देना दो
 
उनको तो  मन्दिर-मस्जिद  से वोट की खेती  करनी थी
हम   आपस   में  लड़ना   सीखे, लेना एक न देना दो

जीना   हमसे   सीख  रहे हैं दुनिया  वाले  लेकिन हम
सीखें    उनके   तौर-तरीक़े,   लेना   एक   न  देना  दो

जब  लाखों  की  भीड़  जुट गई होड़ लगी फिर नारों की 
घुरहू,  रामजतन  भी  चीखे,   लेना   एक  न देना  दो

क्यों   देते  हो  राय सभी को, पूछ रहा  है क्या कोई ?
बोले  मुझसे   मेरे  बेटे,   लेना  एक   न   देना   दो


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