Anjaan shakhs..................real life incidence

by SURESH SANGWAN on September 17, 2016, 12:53:04 PM
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SURESH SANGWAN
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संस्मरण ----अंजान व्यक्ति
कक्षा बारह अच्छे अंकों से उत्तीर्ण करने के बाद दाखिला एन.सी.ई.आर.टी दिल्ली के चार  वर्षीय कोर्स बी.एस..सी बी .एड में अजमेर में हुआ. दाखिला करवाने तो पिताजी साथ गये थे मगर दीपावली की छुट्टियों के बाद पहली बार अकेले अजमेर जाना था.
मम्मी- ( छोटे भाई से) अरे पप्पू भैया इसके साथ जा और ट्रेन में बिठाकर आइयो.
पप्पू- मैं इतनी रात गये वापस कैसे आउँगा मैं नी जा रहा .अपने आप चली जाएगी सीधी तो जाती है बस रेलवे स्टेशन तक.  बहुत डाँट डपट के बाद जैसे तैसे भाई तैयार हुआ.
जैसे ही हम रेलवे स्टेशन पंहुचे ट्रेन प्लॅटफॉर्म पर खड़ी थी. मैंनें  टिकट निकाला और हम एस-५ डब्बा  खोजने लगे.
एक अंजान व्यक्ति हमारे साथ साथ दौड़ लगा रहा थ.वो भी एस-५ ,एस-५ की रट लगाए था,और बोल रहा था आगे चलो आगे है एस-५.आगे नहीं मिला तो बोला पीछे चलो सबसे  पीछे.पप्पू और मैं डब्बा खोजने में व्यस्त थे.उस्के बारे में तो कुछ ख्याल ही ना आया.
इतने में ट्रेन धीरे धीरे चलने लगी .वह अंजान शख़्स बोला अभी चढ़ लो फिर डब्बा बदल लेना ,ख़ैर मुझे  चढ़ा दिया गया. मैनें कहा पप्पू अभी ट्रेन का टाइम नहीं हुआ है शायद इंजन जुड़ रहा है. तू मेरे साथ साथ चल.धीरे २ ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली और मेरे पैरों तले की ज़मीन खिसक गई. एक बिजली सी कौंध गई .ये कैसे चल पड़ी?? मुझे असमंजस में देख एक यात्री ने पूछा आपको कहाँ जाना है? अजमेर !
मगर ये तो बीकानेर जाएगी!      मेरा ज़हन बीकानेर पंहुच कर अजमेर वापसी के तरीके सोचने लगा कि परसों के प्रॅक्टिकल परीक्षा की कोई राह निकले. मन ही मन बहुत घबरा रही थी रात का सफ़र और आग में घी का काम कर रहा था.            टी. टी आया --टिकट     मैनें टिकट दिखाया......अगला स्टेशन रेवाडी है उतर जाना ,पीछे से अहमदाबाद मेल आएगी ,उसमें बैठ लेना.
एक नया आइडिया मिला  को थोड़ी तसल्ली हुई.  लोगों ने सीट ऑफर की मगर बैठने से डर लग रहा था की रेवाडी निकल ना जाए. ख़ैर रात के ११ बजे थे और नींद उड़ी हुई थी .जैसे ही रेल गाड़ी स्टेशन रेवाडी पंहुची ,दो -तीन रेलवे कर्मचारी मुझे उतारने  पंहुचे हुए थे. हे भगवान ये हो क्या रहा है.इन्को कैसे पता चला? किसने बताया होगा इन्हें ?
यहाँ बैठ जाओ अगली ट्रेन में बैठ जाना, एक घंटे बाद आएगी अजमेर वाली. मारे डर के मैनें पूछा तक नहीं की आप लोगों को   किसने बताया? दिल्ली रेलवे स्टेशन से फोन आया है की एक लड़की ग़लत ट्रेन में बैठ गई है.
उफ्फ ..वहाँ किसने बताया? सोच सोच कर परेशान हुई जाती थी. कहीं वो अंजान आदमी? ख़ैर जो होगा देखा जाएगा. मैनें दिल को समझाया.  प्लेट फॉर्म लगभग खाली था. एक घंटा बिताने के लिए मैनें पढ़ना शुरू कर दिया.
गाड़ी आई और मेरी जान में जान आई. ट्रेन में बैठते ही काफ़ी दोस्त मिल गये जो साथ पढ़ते थे. कहा-हम तुझे स्टेशन पर ढूँढ रहे थे. क्योंकि तुझे देखा था बबीता ने.   मैनें कहा अभी जाने दो. बाद में बात करेंगे.
दो दिन बाद पप्पू की चिट्ठी आई जिसका  मुझे बेसब्री से इंतज़ार था.
लिखा था- उसी अंजान शख़्स ने ट्रेन निकलने  के बाद मुझसे पूछा तुम्हारी बहन की जाना कहाँ था?
अजमेर !
अंजान शख़्स- वो तो बीकानेर चली गई. अब एक काम करते हैं स्टेशन मास्टर को ख़बर करते हैं चलो में भी चलता हूँ तुम्हारे साथ.
इधर मम्मी मेरे घर ना आने से बहुत बेचैन थी. फिर तेरे बारे में बताया तो रात भर सो ना सकी. जब तक तू रेवाडी से बैठ नहीं ली में घर के लिए नहीं निकला.
कौन तगा ये अंजान व्यक्ति?? क्या मक़सद था इसका ..यूँ ही प्लेट फॉर्म पर क्यों भटक रहा था??? जिसने इतना तूफान खड़ा कर दिया था!

मौलिक अप्रकाशित रचना
--सुरेश सांगवान 'सरु'


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«Reply #1 on: September 17, 2016, 09:58:44 PM »
waah waah bahut hee achhi kahani hai lekin mere khayaal mein Indian women and girls they lack over all self confidence. India ke andar for women and girls schools mein special classes self confidence and self defence ke liye honi zaroori hain.
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«Reply #2 on: September 18, 2016, 04:07:31 AM »
waah waah bahut hee achhi kahani hai lekin mere khayaal mein Indian women and girls they lack over all self confidence. India ke andar for women and girls schools mein special classes self confidence and self defence ke liye honi zaroori hain.
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Sach Kaha Surindarn Ji Aapne..

Aur Suresh Ji Ye Aapke Liye.. Applause Applause Applause Applause Applause
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«Reply #3 on: September 18, 2016, 11:18:19 AM »
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