रस्म-ओ-रिवाजों...............ambalika(zindagi)

by ambalika sharma on September 01, 2021, 07:36:06 AM
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ambalika sharma
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रस्म-ओ-रिवाज
मैं समझ नही पाऊँगी इस दुनिया की रस्म-ओ-रिवाजों को,
जहाँ बेटी की जवाबदेही स्वाभिमान और बहू का कहना बदतमीज़ी कहा जाता है,
जहाँ बेटियों का सोना थकान और बहुओं का सोना कामचोरी कहा जाता है,
जहाँ बेटियों की क़ाबलियत डिग्री से और बहुओं की पोछा मारने से होती है,
जहाँ बेटियों के आँसू मे दर्द और बहुओ के आँसुओं मे चालाकी होती है,
जो कल तक गुणों का भंडार लिए फिरती थी मायके मे, अब कमियों की किताब बताई जाती है,
जहाँ बेटे का बहनों के लिए प्यार सही और पत्नी से जताई थोड़ी सी चाहत में बुराई जताई जाती है,
जहाँ अपनी बेटियाँ हर पल जुड़ी रहे तुमसे और बहुओं को हर बीता रिश्ता भूलने की बात समझाई जाती है,
जहाँ बेटियों के लिए सुख की कामना और बहुओं के हिस्से आग बरसाई जाती है,
क्यूँ है ऐसा? क्यूँ होता है?
अगर नही अपना सकते गैर को तो बंधन जोड़ो भी मत,
किसी और की जीवन पूंजी को इस तारह तोडो भी मत,
के वो लड़की जो कल तक माँ-बाप की लाडली थी,
तुम्हारे घर आकर अपना वजूद खोकर हर पल मरने की कामना करे,
ना रह पाए खुद खुश ना तुम्हे कोई खुशी दे सके
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