राष्टु पिता महात्मा गांधी

by Ram Krishan Rastogi on October 02, 2021, 12:46:51 PM
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Ram Krishan Rastogi
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राष्ट्र पिता महात्मा गांधी
******************
सत्य अहिंसा के थे वे पुजारी,
नाम था मोहन दास करम चंद गांधी,
माता का नाम था पुतली बाई,
पिता का नाम था करम चंद गांधी।

पैदा हुए थे वे पोरबन्दर में,
कानून की शिक्षा थी पाई।
इस शिक्षा का उपयोग उन्होंने,
साउथ अफ्रीका में अजमाई।।

अहिंसा परमो धर्म मंत्र था उनका
वे भारत के राष्ट्र पिता कहलाए।
सत्य अहिंसा के बल पर ही,
भारत को वे आजाद कर पाए।।

राम गुन धुन के थे वे पक्के,
रोज वे बिरला मंदिर जाते।
वहां अपने वे भजनों द्वारा,
जनता का मन मोह लेते।।

वे तन से थे दुबले पतले,
पर मन से थे बड़े बलशाली।
उन्ही के कारण भारत बना
आज विश्व में बड़ा बलशाली।।

लिया न ढाल कृपाण का सहारा,
कही न तोप व तलवार चलाई।
सत्य अहिंसा के बल पर ही,
उन्होंने भारत को आजादी दिलाई।।

अंग्रेजो भारत को तुम छोड़ो,
यही उनका एकमात्र नारा था।।
इसी नारे के बल बूते पर उन्होंने,
अंग्रेजो को भारत में ललकारा था।।

30 जनवरी उन्नीस सौ अड़तालिस को,
नत्थू राम गोडसे ने उन पर गोली चलाई,
बिरला मंदिर के सामने उन्होंने
इस संसार से विदा थी पाई।।

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«Reply #1 on: October 04, 2021, 09:49:56 AM »
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«Reply #2 on: October 04, 2021, 07:23:21 PM »
राष्ट्र पिता महात्मा गांधी
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सत्य अहिंसा के थे वे पुजारी,
नाम था मोहन दास करम चंद गांधी,
माता का नाम था पुतली बाई,
पिता का नाम था करम चंद गांधी।

पैदा हुए थे वे पोरबन्दर में,
कानून की शिक्षा थी पाई।
इस शिक्षा का उपयोग उन्होंने,
साउथ अफ्रीका में अजमाई।।

अहिंसा परमो धर्म मंत्र था उनका
वे भारत के राष्ट्र पिता कहलाए।
सत्य अहिंसा के बल पर ही,
भारत को वे आजाद कर पाए।।

राम गुन धुन के थे वे पक्के,
रोज वे बिरला मंदिर जाते।
वहां अपने वे भजनों द्वारा,
जनता का मन मोह लेते।।

वे तन से थे दुबले पतले,
पर मन से थे बड़े बलशाली।
उन्ही के कारण भारत बना
आज विश्व में बड़ा बलशाली।।

लिया न ढाल कृपाण का सहारा,
कही न तोप व तलवार चलाई।
सत्य अहिंसा के बल पर ही,
उन्होंने भारत को आजादी दिलाई।।

अंग्रेजो भारत को तुम छोड़ो,
यही उनका एकमात्र नारा था।।
इसी नारे के बल बूते पर उन्होंने,
अंग्रेजो को भारत में ललकारा था।।

30 जनवरी उन्नीस सौ अड़तालिस को,
नत्थू राम गोडसे ने उन पर गोली चलाई,
बिरला मंदिर के सामने उन्होंने
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Bohut ache धन्यवाद जी
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