vo din

by sanidhya sharma on January 15, 2013, 10:22:33 PM
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sanidhya sharma
Guest
बेमतलब का पागलपन और बेकार की  वो दिन
किसी की जीत क वो दिन किसी की हार के वो दिन
मिलते नहीं मुझको किसी कीमत पे वो लम्हे
किसी त्यौहार क वो दिन तुम्हारे प्यार के वो दिन

रहा करते थे दोनों जब एक दूजे की आँखों मैं
की  बस बाकि है दिल मई जो उस संसार के वो दिन

किसी चेहरे पे मरता था हर रोज जब कोई
कभी इनकार के वो दिन कभी इकरार के वो दिन

जरा सा फासला था जब हम दोनों के कमरों मैं
कभी इस पार के वो दिन कभी उस पार क वो दिन
बस किस्सों मैं बाकि है और दिल मैं है मेरे
जब तुम साथ थी मेरे कभी एक बार क वो दिन


..............सानिध्य .......
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sbechain
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«Reply #1 on: January 15, 2013, 11:30:41 PM »
बेमतलब का पागलपन और बेकार की  वो दिन
किसी की जीत क वो दिन किसी की हार के वो दिन
मिलते नहीं मुझको किसी कीमत पे वो लम्हे
किसी त्यौहार क वो दिन तुम्हारे प्यार के वो दिन

रहा करते थे दोनों जब एक दूजे की आँखों मैं
की  बस बाकि है दिल मई जो उस संसार के वो दिन

किसी चेहरे पे मरता था हर रोज जब कोई
कभी इनकार के वो दिन कभी इकरार के वो दिन

जरा सा फासला था जब हम दोनों के कमरों मैं
कभी इस पार के वो दिन कभी उस पार क वो दिन
बस किस्सों मैं बाकि है और दिल मैं है मेरे
जब तुम साथ थी मेरे कभी एक बार क वो दिन


..............सानिध्य .......

good........!
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