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- सावन की विशेषता
- तुम यूँ ही तलाशते रहे ,,,saahill
- कागज पर मुमकिन ,,,saahill
- तुम्हारे बिना जीना ,,,saahill
- खुद से मुलाकात ,,,saahill
- दिल पर लगा दी ,,,,, saahill
- तुमने कभी खुद को ,,,,saahill
- तुम्हे नशा ना कहूँ ,,,saahill
- कैसे बताऊं हर किसी को ,,,, SAAHILL ,
- शाइर को दुआ
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*सावन माह की विशेषता*
सावन मे ज़ब भी बादल आते, साजन का सन्देशा भी वे लाते। सन्देशा ज़ब मै उनका पढ़ती, आँखो से आंसू मेरे आ जाते ।।
सावन मे ज़ब नन्नी नन्नी बुँदे पडती, वे भी साजन के मन की बातें कहती। मै ध्यान लगाकर उनको सब सुनती, फिर साजन आने के सपने मै बुनती।।
सावन मे सूरज कहाँ छिप जाता, ...
तुम यूँ ही तलाशते रहे कागज़ पर खुद को ,,, हमने तुम्हे अपने दिल पर लिखा है
कागज पर मुमकिन नहीं थी तारीफ तुम्हारी ,,,, हमने अपने दिल पर तुम्हे हसीन लिख दिया
तुम्हारे बिना जीना मुमकिन नहीं है ,,,, हमेशा सांसों की बात मत किया करो
देखते हैं तन्हा रह कर कभी ,,, शायद खुद से मुलाकात हो जाए
तुमने बात दिल पर लगा दी ,,,,, बस यही बात दिल पर लग गई
तुमने कभी खुद को नहीं देखा शायद ,,, यकीन करो तुम खुद से ज्यादा खूबसूरत हो
बिना जाम के कदम बहक जाते हैं ,,,, तुम्हे नशा ना कहूँ तो क्या कहूं
कैसे बताऊं हर किसी को मेरा पता ठिकाना ,,,,, तुम्हारा दिल है कोई गली मोहल्ला नहीं
शाइर को दुआ
रोज़ तेरे क़लम में धार आये रोज़ तुझको किसी पे प्यार आये रोज़ एहसास की घटा उमड़े रोज़ जज़्बात की फुहार आये रोज़ ग़ुंचा ख़याल का चटके रोज़ अल्फ़ाज़ पर बहार आये रोज़ महके हुए क़वाफ़ी हों रोज़ अशआर पर निखार आये रोज़ महबूब का तसव्वुर हो ...
तुम्हे खोने के डर से हमने ,,,,, तुम्हे पाने की जिद छोड़ दी
*पत्नि के पर्यायवाची शब्दों पर कविता*
जो पत्नि का धर्म निभाए उसे धर्मपत्नी कहते है। जो जीवन भर तुम्हारे साथ रहे उसे जीवनसंगनि कहते है। जो गृह क़ो अच्छी तरह चलाये उसे गृहणि कहते है। जो केवल घर मे रहे उसे घरवाली कहते है। जो जोर जोर से बोले उसे जोरू कहते है। जो अपने ब...
*योग या दिखावा*
जंग फ़ूड का जो करते उपयोग, उनका भला नही करे कोई योग। जो खाते है स्वच्छ सादा भोग, उनका भला करता सैदेव योग।।
एक दिन योग करने से कुछ न होगा, नित्य नियम से रोजाना करना होगा। इसको बनाओ अपने जीवन की शैली, तब कहीं इसका अधिक फायदा होगा।।
योग के बहाने दिखावा करते है लोग, सच्ची...
चल रही है हाए-बाए फ़ोन पर हमने सब रिश्ते निभाये फ़ोन पर
इक वही जाने कि घर लौटा हूँ मैं आ गया है वाए-फ़ाए फ़ोन पर
कितने ही अपने पराये हो गये नाम किस-किस के हैं पाये फ़ोन पर
सब के सब हर फ़न के मौला हो गये जबसे ए.आए को लाये फ़ोन पर
इतन...
हमसे मिलना हो तो ख्यालों में आना पड़ेगा ,,,, मुलाकात के लिए वही जगह मुकर्रर की है
मेरी आँखों का नशा टूट रहा है ,,,, तुमसे नजरें मिलाना अब जरूरी है
डूब जाना तय था मेरा ,,, उसकी आँखें बहुत गहरी थी
बहकना और महकना जायज़ है शायद ,,,, तुम्हारी इत्र जैसी मोहब्बत में नशा भी है
सुब्ह कोलगेट से जागे हम लोग सर पे बाटा लिेए भागे हम लोग रेस में आगे निकलना था हमें ईएमाए पीछे है आगे हम लोग झूठ सोने से चमकते हैं यहाँ और सोने पे सुहागे हम लोग एक चादर है सभी के ऊपर खोलते उसके ही धागे हम लोग कुछ सुनहरे हिरनों के पीछे
kab kaha ke khushiyon ka abe zam zam mile ilteja itni si hain ke gham thoda kam mile
kehkasha e husn e yaad ek waadi ho gayi wo jagah ke jaha tujhse hum mile
maikhano me beet rahi he umr jo dua he ek nazar dekhne haram mile
chhod di hain haqeeqat ki ummed humne wafa na sahi waf...
आप फ़ाज़िल* हैं क्या किया जाए लोग जाहिल हैं क्या किया जाए *विद्वान
इन रियाकारियों* में आप के साथ हम भी शामिल हैं क्या किया जाए *पाखंडों
वो समझते कि हल मसाइल* के बस मिसाइल हैं क्या किया जाए *समस्याओं
सैकड़ों में वो एक सूरत है सैकड़ों...
जेठ की दुपहरी
देख दुपहरी जेठ की,हर कोई मांगत छाय। माह मास में देखत इसे,मन ही मुस्काय।।
देख दुपहरी जेठ की,सब लोग है परेशान। ठंडे दूध के साथ क़र रहे है सब जलपान।।
देख दोपहरी जेठ की,आलू भी हुआ बेहाल। पानी बिन उबल रहा,देखो गरमी की चाल।।
देख दोपहरी जेठ की,तरुवर भी अकुलाय। पथिक तरु की छाय म...
मीरो-ग़ालिब का परस्तार* भी हूँ दौरे-हाज़िर का अलमदार** भी हूँ *उपासक **ध्वजावाहक
आज के हाल से बेज़ार भी हूँ कल की उम्मीद से सरशार* भी हूँ *छलकता हुआ
हुस्ने-दुनिया का मुसव्विर* हूँ मगर साथ में आईना-बरदार भी हूँ *चित्रकार
मैं ...
हमसे मिलना हो तो ख्यालों में आइए ,,, हम हर जगह मिलते नहीं हैं
ना बनना तुम सबब मेरी परेशानी का कभी ,,,,,, मैने हर किसी को तुम्हे सुकून बताया है
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