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- पत्नि के पर्यायवाची शब्द
- योग या दिखावा
- chal rahi hai hi-bye phone par
- मुलाकात के लिए ,,,saahill
- तुमसे नजरें ,,saahill
- उसकी आँखें ,,,saahill
- मोहब्बत में नशा ,,,,saahill
- subh colgate se jaage hum log
- Kab kaha ke khushiyon ka
- आप फ़ाज़िलहैं क्या किया जाए
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*पत्नि के पर्यायवाची शब्दों पर कविता*
जो पत्नि का धर्म निभाए उसे धर्मपत्नी कहते है। जो जीवन भर तुम्हारे साथ रहे उसे जीवनसंगनि कहते है। जो गृह क़ो अच्छी तरह चलाये उसे गृहणि कहते है। जो केवल घर मे रहे उसे घरवाली कहते है। जो जोर जोर से बोले उसे जोरू कहते है। जो अपने ब...
*योग या दिखावा*
जंग फ़ूड का जो करते उपयोग, उनका भला नही करे कोई योग। जो खाते है स्वच्छ सादा भोग, उनका भला करता सैदेव योग।।
एक दिन योग करने से कुछ न होगा, नित्य नियम से रोजाना करना होगा। इसको बनाओ अपने जीवन की शैली, तब कहीं इसका अधिक फायदा होगा।।
योग के बहाने दिखावा करते है लोग, सच्ची...
चल रही है हाए-बाए फ़ोन पर हमने सब रिश्ते निभाये फ़ोन पर
इक वही जाने कि घर लौटा हूँ मैं आ गया है वाए-फ़ाए फ़ोन पर
कितने ही अपने पराये हो गये नाम किस-किस के हैं पाये फ़ोन पर
सब के सब हर फ़न के मौला हो गये जबसे ए.आए को लाये फ़ोन पर
इतन...
हमसे मिलना हो तो ख्यालों में आना पड़ेगा ,,,, मुलाकात के लिए वही जगह मुकर्रर की है
मेरी आँखों का नशा टूट रहा है ,,,, तुमसे नजरें मिलाना अब जरूरी है
डूब जाना तय था मेरा ,,, उसकी आँखें बहुत गहरी थी
बहकना और महकना जायज़ है शायद ,,,, तुम्हारी इत्र जैसी मोहब्बत में नशा भी है
सुब्ह कोलगेट से जागे हम लोग सर पे बाटा लिेए भागे हम लोग रेस में आगे निकलना था हमें ईएमाए पीछे है आगे हम लोग झूठ सोने से चमकते हैं यहाँ और सोने पे सुहागे हम लोग एक चादर है सभी के ऊपर खोलते उसके ही धागे हम लोग कुछ सुनहरे हिरनों के पीछे
kab kaha ke khushiyon ka abe zam zam mile ilteja itni si hain ke gham thoda kam mile
kehkasha e husn e yaad ek waadi ho gayi wo jagah ke jaha tujhse hum mile
maikhano me beet rahi he umr jo dua he ek nazar dekhne haram mile
chhod di hain haqeeqat ki ummed humne wafa na sahi waf...
आप फ़ाज़िल* हैं क्या किया जाए लोग जाहिल हैं क्या किया जाए *विद्वान
इन रियाकारियों* में आप के साथ हम भी शामिल हैं क्या किया जाए *पाखंडों
वो समझते कि हल मसाइल* के बस मिसाइल हैं क्या किया जाए *समस्याओं
सैकड़ों में वो एक सूरत है सैकड़ों...
जेठ की दुपहरी
देख दुपहरी जेठ की,हर कोई मांगत छाय। माह मास में देखत इसे,मन ही मुस्काय।।
देख दुपहरी जेठ की,सब लोग है परेशान। ठंडे दूध के साथ क़र रहे है सब जलपान।।
देख दोपहरी जेठ की,आलू भी हुआ बेहाल। पानी बिन उबल रहा,देखो गरमी की चाल।।
देख दोपहरी जेठ की,तरुवर भी अकुलाय। पथिक तरु की छाय म...
मीरो-ग़ालिब का परस्तार* भी हूँ दौरे-हाज़िर का अलमदार** भी हूँ *उपासक **ध्वजावाहक
आज के हाल से बेज़ार भी हूँ कल की उम्मीद से सरशार* भी हूँ *छलकता हुआ
हुस्ने-दुनिया का मुसव्विर* हूँ मगर साथ में आईना-बरदार भी हूँ *चित्रकार
मैं ...
हमसे मिलना हो तो ख्यालों में आइए ,,, हम हर जगह मिलते नहीं हैं
ना बनना तुम सबब मेरी परेशानी का कभी ,,,,,, मैने हर किसी को तुम्हे सुकून बताया है
बार बार यूं देखते हो आईना ,,,, तुम्हे यकीन नहीं के तुम खुद से ज्यादा खूबसूरत हो
अनकही रह जाएगी या अनसुनी हो जाएगी बात फैलेगी तो अच्छी या बुरी हो जाएगी
रात में सूरज तुम्हें रस्ता नहीं बतलाएगा पर सितारों से तुम्हारी दोस्ती हो जाएगी
ज़िंदगी हस्सास* लोगों की बहुत बेरहम है इक ज़रा सी बात भी कितनी बड़ी हो जाएगी *सम्वेदनशील
इस क़द...
ये नुस्ख़ा आज़मा कर देखते हैं गिले शिकवे भुला कर देखते हैं दिखावा तो ज़रा नफ़रत में भी है मुहब्बत ही जता कर देखते हैं तअम्मुल* उसको भी शायद यही हो हमीं नम्बर मिला कर देखते हैं *संकोच मोहल्ले के नहीं आदाब वरना बग़ल के घर में जा कर देखते हैं
न ख़ुदा की न तो ख़ुदाई की फ़िक्र हमको है ईएमआई की
बेपढ़े लिख रहे नसीब अपना क्या इसी के लिए पढ़ाई की
चुप था जब चापलूस बोल रहे मैंने इस तरहा लब-कुशाई* की *बोलने के लिए होंठ खोलना
बिक गए ताज लुट गए क़िलए हम फ़क़ीरों ने जब गदाई* की *भिक्षा-व...
रात के जागने-वालों के लिए फ़ोन काफ़ी है उजालों के लिए
न तो मेलों न रिसालों के लिए शे’र कहता हूँ सवालों के लिए
न ही होंटों न ही गालों के लिए मेरे बोसे तो हैं छालों के लिए
अपनी बातें ही मुनासिब न लगीं ये हुआ ताज़ा ख़यालों के लिए
तेल देने...
meraj e muhabbat , hain milna kisi ka yu dil pe chadha , rang gehra kisi ka
ae waqt ruk ja , isi pal ke mujhko yaad aa gaya hain, chehra kisi ka
zikr mehtab ka jo , tune chheda humnashin fasana jubaan par , aa thehra kisi ka
soye se din hain, aur jaagi si raatein deewana kar dega , y...
बुझे दियों ने भी सौगंध खाई जलने की हवा ने बात बड़े ज़ोर से की चलने की
हमें कुछ और भी बेग़ैरती से जीना है हमारे ख़ून को आदत नहीं उबलने की
वहाँ गए थे जो लम्बी कतार में लगकर वही तलाश रहे राह अब निकलने की
कभी था ठोकरें खाने पे ख़ूब नाज़ मुझे सँभल के ...
gunhagar hu sach he , magar aarif ye dekh haafiz na sahi , magar kaafir nahi hu main
kya raat hain jisme chand na ho kya hum hain jisme tum na ho
kuch keh du tere baare mein to baat sukhan se kam na ho
kuch dil me aur kuch sajde mein Hain duaa tu mujhse dur na ho
koi gulshan he jisme gul nahin Wo mehfil ke jisme tum na ho
Nigah Kesi agar shokhi nahi
ishq kesa a...
Juda kese ho sakte hain , hum dono bhala, Ankhon se nahi humne, dil se ishq kiya hain
बस ये कहते ही रहे आग में जलने वाले हम भी घर छोड़के हरगिज़ न निकलने वाले
ये सभी फ़ोन से दुनिया को बदलने वाले हैं ट्विटर और ज़ोमैटो से बहलने वाले
सारी माँओं ने तो इक जैसी दुआएँ दीं हैं सारे बच्चे ही नहीं फूलने-फलने वाले
रील के वास्ते हर हद से गुज़र जाए...
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