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Latest Shayari at Yoindia Shayariadab
*ज़ब ज़ब मनुष्य का विश्वास कम हुआ*
ज़ब ज़ब मनुष्य का विश्वास कम हुआ। तब तब नई नई चीजों का जन्म हुआ।।
ज़ब ज़ब मनुष्य को चोरी का अंदेशा हुआ। तब तब नये नये दरबाजो का जन्म हुआ।।
ज़ब ज़ब मनुष्य विश्वास पर आघात हुआ। तब तब नये नये ताले चाबी का जन्म हुआ।।
ज़ब ज़ब विश्वास का पूरा दफन हुआ। तब सीसी टीवी ...
नज़्म - पंगा
पंगे में भी पड़ना सीखो बात पे अपनी अड़ना सीखो हारे क्यूँ हो लड़ना सीखो आख़िर कब तक चुप रहना है सहने से अच्छा कहना है
सदक़े जिनके तुमने उतारे ग़लती उनकी सर पे तुम्हारे तुम डूबे हो और वो तारे मुर्दे जैसा क्यूँ बहना है सहने से अच्...
ना ढूंढ कोई वफ़ादार इस दुनिया मे, पहले ख़ुद वफ़ादार बन तू दुनिया मे। वफादार तो तेरी औलाद भी न निकली, जिसको जन्म दिया तूने इस दुनिया मे।।
पैसे के है सभी मीत इस भरी दुनिया मे, कोई किसी का नही इस भरी दुनिया मे। पैसा होगा तेरे पास सभी मीत बन जायेगे, अजमा के देख ले इस बात को दुनिया मे।।
आर के रस...
*धुएं से धुआँ से हो रही है जिन्दगी*
धुएँ से धुआँ हुई है,अब जिंदगी , तम्बाकू से बर्बाद हुई है जिंदगी | बचना चाहते हो अगर तुम इससे , तम्बाकू छोड़ो बचा लो ये जिंदगी ||
धुआँ राख़ कर रहा है ये जिंदगी , मिला रहा है ये ख़ाक में जिंदगी | बंद करो उड़ाना तुम इस धुएँ को , वरना ख़त्म हो जायेगी ये जिंदगी ...
पूरी तो ख़ैर कोई भी ख़्वाहिश नहीं हुई उस पर क़नाअतों* की सताइश** नहीं हुई *संतोष **प्रशंसा
अलबत्ता रौशनी तो हमारे ख़िलाफ़ थी पर हमसे तीरगी* की सिफ़ारिश नहीं हुई *अँधेरा
सबसे अज़ीज़ आरज़ू दिल में सँभाल ली उस पर किसी के मेहर की बार...
*धरा पर ही धरा रह जायेगा*
इस धरा से कुछ नही ले जायेगा, सब धरा पर ही धरा रह जायेगा। कर ले कुछ नेक काम इस धरा पे नेक काम ही इस धरा से जायेगा।
धरा ही आज हमारी धरोहर है, इसके बराबर कोई न धरोहर है। धरा न होती तो जीवन न होता, प्राणियों के यही बड़ी धरोहर है।।
धरा के लिए सब आज लड़ रहे है, एक...
धरा मे सब खनिज पदार्थ गड़े है, इसलिय सभी इसके पीछे पडे है। धरा के बराबर कोई भी लोक नही इसमें ही केवल सोना चांदी जड़े है।।
उसने कम सोचा मगर मैंने ज़ियादा सोचा बेवफ़ा हो गया जब तक कोई वादा सोचा
कोई इल्ज़ाम है क्या वो है ज़माने की तरह मेरी ही सादा-दिली थी उसे सादा सोचा
चाहता हूँ कि मुझे आए वो रह-रह के ख़याल जब भी आया है तो हर बार ही आधा सोचा
मयकदा मान के दुनिया से निभाया मैं...
यह पल,
दोस्तों से मिलने पर खिंच जाता है,
खुशियाँ देते-देते सिमट जाता है।
दुख के मौसम में ठहरा-सा लगता है,
लेकिन यह पल—पलक झपकते ही बीत जाता है।
बारिश गिरने पर भीग जाता है,
सूरज निकलते ही रोशनी बटोरता है।
चाँदनी रात में सुकून-सा लगता है,
लेकिन तुम्हें भी पता है—
यह पल, पल...
मोहलत भी ज़िंदगी ने दी गिनकर ग़ुलाम को जैसे कि फ़ोन बॉस का संडे की शाम को
फिर ये पता लगा कि वो कॉन्ट्रैक्ट ही तो था और हम वुजूद मान के बैठे थे काम को
उजलत* से वक़्त आने पे उसने भुला दिया मुश्किल से जिसने याद किया मेरे नाम को *जल्दी
यारों ने आते-आत...
Laut Aati Hain Wo Tareeqein,. Magar Wo Din Laut Kar Nahi Aate,.
May Allah Bless You,. Happy Belated Birthday
तुम्हे तो हम मोहब्बत कहते रहे ,,,, तुम तो हमारी ज़िंदगी निकले
कोई पूछे तुमसे तुम्हारा पता तो खामोश रहना ,,,, तुम्हारे सिवा कोई मेरे दिल तक पहुंचे यह ग्वारा नहीं
कोई दवा तो बता रोग ए इश्क की ,,,, मर्ज भी बढ़ जाए और आराम भी आ जाए
मेरे टूट जाने की हद तो देखो ,,,, सांसें सिमटी मगर ज़िंदगी बिखरी हुई है
माना के मेरी मोहब्बत शराबी है ,,,, क्या करूं इसे नशा जो तुम्हारा लगा है
Ta-Umra Guzaar Dii Usne Nafaa Nuksaan Karne Mein...
Ta-Umra Guzaar Dii Usne Nafaa Nuksaan Karne Mein...
Mout Aayi To Kaha Usne Pata Ke Ek Hisaab Baaki Hai....
:- Touhid -:
सहरा के आस-पास न सागर के आस-पास तन्हा हैं लोग मॉल थिएटर के आस-पास
दुनिया का इक तवील सफ़र तय तो कर लिया मैं घर की राह भूल गया घर के आस-पास
क्यूँ चलते-चलते हमसफ़रो गिर पड़ा हूँ मैं पत्थर कोई मिला नहीं ठोकर के आस-पास
हर कोई बातचीत करे दूर-दूर से रहकर...
तू लिख मुझे इस तरह,मेरा सिवा कोई पढ़ न सके, छिपा ले अपने दिल मे इस तरह कोई देख न सके। तेरे हर लफ्ज़ मे जिक्र हों मेरा मगर इस तरह कि, तेरे सिवा जिक्र मेरा कोई और बंदा न कर सके।।
बात मुझसे इस तरह कर, कोई दूसरा ना सुन सके स्वप्न मेरे लिए ऐसे बुनना , कोई दूसरा ना बुन सके।<...
ज़र्रा से आफ़ताब का इतना रहा सफ़र लम्बा था इंतज़ार सा जीवन सा मुख़्तसर
राहे-तलब* थी या कि वो राहे-नजात** थी तय की बग़ैर मैप ही हर एक रहगुज़र *इच्छा पथ **मुक्ति मार्ग
रक्खी न हिज्र में कभी उम्मीद वस्ल की इस दर्दे-दिल को बनने दिया है न दर्दे-सर...
अक्सर मोहब्बत से बातें होती हैं,,, बस तुम्हारा ही ज़िक्र करती है वो
मेरी खामोशी को पड़ना कभी,,, लफ़्ज़ों में मेरा किरदार अधूरा सा है
ऐ खुदा कहाँ मिलेगी वो कलम ये बता ,,,, उसके नाम की लकीर हाथ मे खींच दूँ जिस से
Bahut kuch kehna tha tumse, ek baar mauka to deti...
Mere dil mein dabe toofanon ko, kinara to deti. Faisla suna kar chal di tum, meri safai sune bina, Kam se kam meri wafao’n ko, sahara to deti.
Wo lafz jo honton tak aakar, phir aansu ban gaye, Un bheege hue alfazon ko, ishara to deti. ...
bade saleeke se hum apne zakhm chupate hain, wo puchte hain haal to hum bas muskuraate hain, tujhse koi gila nahi, na koi shikayat hai ab, bas kabhi-kabhi tute hue khwaab bohot sataate hain,
suna hai wo khush hain apni nayi duniya mein, hum aaj bhi purani yaadon se dil behlate hain, maloom ...
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