तुम जो बदले तो by samir parimal

by samir parimal on April 01, 2013, 12:26:41 AM
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samir parimal
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एक बिलकुल नयी ग़ज़ल पेशे-खिदमत है, आपकी मोहब्बत का तलबगार हूँ...

तुम जो बदले तो ज़माने को बदलते देखा,
 भींगी पलकों पे समंदर को मचलते देखा.
 
जब भी दीदार ख्यालों ने किया है तेरा,
 दौलते-हुस्न को अश'आर में ढलते देखा.
 
आसमां जैसे उतर आया शहर में तेरे,
 रात कूचे में तेरे चाँद टहलते देखा.
 
ठोकरें खा के संभलते हैं, सुना करते थे,
 ठोकरें खा के भी आशिक़ को फिसलते देखा.
 
बेवफा उसको कहें, गैर-मुनासिब होगा,
 इश्क़ की आग में पत्थर भी उबलते देखा.
 
हम तो सदियों से मोहब्बत को जिया करते हैं,
 वरना दुनिया को तिज़ारत पे ही पलते देखा.
 
गैर-मुमकिन नहीं कुछ दौरे-वफ़ा में 'परिमल',
 फूल के जिस्म में काँटों को पिघलते देखा.
 
        - समीर परिमल
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marhoom bahayaat
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«Reply #1 on: April 01, 2013, 01:27:10 AM »
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एक बिलकुल नयी ग़ज़ल पेशे-खिदमत है, आपकी मोहब्बत का तलबगार हूँ...

तुम जो बदले तो ज़माने को बदलते देखा,
 भींगी पलकों पे समंदर को मचलते देखा.
 
जब भी दीदार ख्यालों ने किया है तेरा,
 दौलते-हुस्न को अश'आर में ढलते देखा.
 
आसमां जैसे उतर आया शहर में तेरे,
 रात कूचे में तेरे चाँद टहलते देखा.
 
ठोकरें खा के संभलते हैं, सुना करते थे,
 ठोकरें खा के भी आशिक़ को फिसलते देखा.
 
बेवफा उसको कहें, गैर-मुनासिब होगा,
 इश्क़ की आग में पत्थर भी उबलते देखा.
 
हम तो सदियों से मोहब्बत को जिया करते हैं,
 वरना दुनिया को तिज़ारत पे ही पलते देखा.
 
गैर-मुमकिन नहीं कुछ दौरे-वफ़ा में 'परिमल',
 फूल के जिस्म में काँटों को पिघलते देखा.
 
        - समीर परिमल


gr8888888888888888888,sir
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Advo.RavinderaRavi
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«Reply #2 on: April 01, 2013, 01:38:05 AM »
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Nice.
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sbechain
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«Reply #3 on: April 01, 2013, 01:58:31 AM »
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एक बिलकुल नयी ग़ज़ल पेशे-खिदमत है, आपकी मोहब्बत का तलबगार हूँ...

तुम जो बदले तो ज़माने को बदलते देखा,
 भींगी पलकों पे समंदर को मचलते देखा.
wah wah .........!
जब भी दीदार ख्यालों ने किया है तेरा,
 दौलते-हुस्न को अश'आर में ढलते देखा.
bahut khoob..............!
आसमां जैसे उतर आया शहर में तेरे,
 रात कूचे में तेरे चाँद टहलते देखा.
 kya kahne ji wah wah.......!
ठोकरें खा के संभलते हैं, सुना करते थे,
 ठोकरें खा के भी आशिक़ को फिसलते देखा.
  Laughing hard Laughing hard Laughing hard Laughing hardhaan ji sahi kaha dekha hai maine.....!
बेवफा उसको कहें, गैर-मुनासिब होगा,
 इश्क़ की आग में पत्थर भी उबलते देखा.
ye sher moqammal nahin hai meri samjh se apni baat ko sahi tariqe se nahin kah paa raha hai..............! icon_flower icon_flower
हम तो सदियों से मोहब्बत को जिया करते हैं,
 वरना दुनिया को तिज़ारत पे ही पलते देखा.
 
गैर-मुमकिन नहीं कुछ दौरे-वफ़ा में 'परिमल',
 फूल के जिस्म में काँटों को पिघलते देखा.

 khoob......!
 
        - समीर परिमल

bahut khoob.......!
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Intezar
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«Reply #4 on: April 01, 2013, 03:41:34 AM »
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bahut khoob ...!
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sksaini4
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«Reply #5 on: April 01, 2013, 12:14:21 PM »
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nice
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Sudhir Ashq
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«Reply #6 on: April 01, 2013, 01:32:57 PM »
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तुम जो बदले तो ज़माने को बदलते देखा,
 भींगी पलकों पे समंदर को मचलते देखा.
 
जब भी दीदार ख्यालों ने किया है तेरा,
 दौलते-हुस्न को अश'आर में ढलते देखा.
 
आसमां जैसे उतर आया शहर में तेरे,
 रात कूचे में तेरे चाँद टहलते देखा.
 
ठोकरें खा के संभलते हैं, सुना करते थे,
 ठोकरें खा के भी आशिक़ को फिसलते देखा.
 
बेवफा उसको कहें, गैर-मुनासिब होगा,
 इश्क़ की आग में पत्थर भी उबलते देखा.
 
हम तो सदियों से मोहब्बत को जिया करते हैं,
 वरना दुनिया को तिज़ारत पे ही पलते देखा.
 
गैर-मुमकिन नहीं कुछ दौरे-वफ़ा में 'परिमल',
 फूल के जिस्म में काँटों को पिघलते देखा.
 
        - समीर परिमल

Wah,Wah Parimalji,Bahut khoob ghazal kahi hai aapne.Such me lazabab.Mubarak ho aapko.
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ParwaaZ
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«Reply #7 on: April 01, 2013, 02:23:07 PM »
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Parimal Jee Aadaab!


bahut khoob janab bahut khob badi hi khoobsurat aur umdaa kalaam kahi hai aapne... bade hi umdaa khayaal aur behad khoobsurat adaygi rahi.. Usual Smile


Sabhi ashaar behad khoob rahe janab.. is khoobsurat aur umdaa kalaam par humari hazaaroN dili daad O mubbarakbad kabul kijiye... Usual Smile


Likhate rahiye... bazm meiN aate rahiye...
Shaad O aabaad rahiye..

Khuda Hafez.. Usual Smile




जब भी दीदार ख्यालों ने किया है तेरा,
 दौलते-हुस्न को अश'आर में ढलते देखा.
 
आसमां जैसे उतर आया शहर में तेरे,
 रात कूचे में तेरे चाँद टहलते देखा.
 
ठोकरें खा के संभलते हैं, सुना करते थे,
 ठोकरें खा के भी आशिक़ को फिसलते देखा.
 
गैर-मुमकिन नहीं कुछ दौरे-वफ़ा में 'परिमल',
 फूल के जिस्म में काँटों को पिघलते देखा.
 
        - समीर परिमल


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ghayal_shayar
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«Reply #8 on: April 18, 2013, 09:26:33 AM »
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parimal saaheb, umdaa bayaangi hi aapki, umeed karta huN yuNhi aage v aapko padhte rehne ka muka milta rahegaa...
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«Reply #9 on: May 29, 2013, 06:33:19 PM »
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Congratulations,

Your beautiful creation has been featured in Yoindia Shayariadab May 2013 newsletter, hopefully you will continue to grace Yoindia Shayariadab with your creations and beautiful words. For more information you can see Yoindia Shayariadab May 2013 Newsletter.
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