zindagi

by alfaaz on July 15, 2013, 12:32:50 AM
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alfaaz
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जिन्द्गी क्या है तु, तेर मन्सुबा क्या है?
पल पल मे इम्तिहान, आखिर माजरा क्या है?

सवाल ये नही की तु मुझे मिला था की मै तुझको
पर अब कौन किसे क्या सम्झाऐ ये बता मुझको

आना ही था तुझको तो कोई और बहाना खोजता
बेवकूफ़ मुझसा नही कोई और सयाना तो चूनता

पछ्ता रहे हम,  अब देख कर एक दुसरे को
तोबा कर रहे हम, मिले न फिर कभी एक दुसरे को

दिन ढल रह है चिराग बुझने से पेह्ले एक वादा कर
ऐसा चोला पेहनकर फिर कभी कहीं आया जाया न कर

जाते जाते ये बता जा कैसे चुकेगा आंसूओ का हिसाब
आखिर कंहा जाकर थमेगा ईन शोलों का सैलाब

सच तो ये है दोस्त की मुझे मेरा कोई गम नही
मेरी वजह से कोई रोये ये भी मौत से कुछ कम नही

क्या हिसाब दुंगा जब मिलेंगे उस जहान में
जब करेगा वो सवाल बडे इत्मिनान से

खौफ़ मौत का नही , जिन्दगी तूझसे डर है मुझ्को
कफ़न से क्या गिला, सांसों ने घेरा है मुझ्को

फिर कभी कहीं मुलकात होगी तो जरूर तुमको आजमाऐंगे
आइना बनकर, तुम्हारा चेहरा तुमको जरूर दिखाऐंगे

ये मेरा कर्ज तुमपे बाकी रहा
ये अधूरा तर्ज भी तुमपे उधार रहा
सूद जोड्के किसी गरीब को चुका जरुर देना
आस्मान बनकर किसी मायूस को सुना जरुर देना

तन्हांईयो मे अक्सर सवाल जवाब करता हूं
जवाब कम, सवालों को ज्यादा पाता हूं

जिन्दगी तेरा ये लतिफ़ा भी खुब रहा "राज"
हंस हंस के परेशान है दुनिया आज


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Advo.RavinderaRavi
Guest
«Reply #1 on: July 15, 2013, 02:04:18 AM »
जिन्द्गी क्या है तु, तेर मन्सुबा क्या है?
पल पल मे इम्तिहान, आखिर माजरा क्या है?

सवाल ये नही की तु मुझे मिला था की मै तुझको
पर अब कौन किसे क्या सम्झाऐ ये बता मुझको

आना ही था तुझको तो कोई और बहाना खोजता
बेवकूफ़ मुझसा नही कोई और सयाना तो चूनता

पछ्ता रहे हम,  अब देख कर एक दुसरे को
तोबा कर रहे हम, मिले न फिर कभी एक दुसरे को

दिन ढल रह है चिराग बुझने से पेह्ले एक वादा कर
ऐसा चोला पेहनकर फिर कभी कहीं आया जाया न कर

जाते जाते ये बता जा कैसे चुकेगा आंसूओ का हिसाब
आखिर कंहा जाकर थमेगा ईन शोलों का सैलाब

सच तो ये है दोस्त की मुझे मेरा कोई गम नही
मेरी वजह से कोई रोये ये भी मौत से कुछ कम नही

क्या हिसाब दुंगा जब मिलेंगे उस जहान में
जब करेगा वो सवाल बडे इत्मिनान से

खौफ़ मौत का नही , जिन्दगी तूझसे डर है मुझ्को
कफ़न से क्या गिला, सांसों ने घेरा है मुझ्को

फिर कभी कहीं मुलकात होगी तो जरूर तुमको आजमाऐंगे
आइना बनकर, तुम्हारा चेहरा तुमको जरूर दिखाऐंगे

ये मेरा कर्ज तुमपे बाकी रहा
ये अधूरा तर्ज भी तुमपे उधार रहा
सूद जोड्के किसी गरीब को चुका जरुर देना
आस्मान बनकर किसी मायूस को सुना जरुर देना

तन्हांईयो मे अक्सर सवाल जवाब करता हूं
जवाब कम, सवालों को ज्यादा पाता हूं

जिन्दगी तेरा ये लतिफ़ा भी खुब रहा "राज"
हंस हंस के परेशान है दुनिया आज



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Sapna Pandit
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«Reply #2 on: July 15, 2013, 02:39:39 AM »
good one
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aqsh
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«Reply #3 on: July 15, 2013, 05:26:36 AM »
bahut khoob...
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Shuruti
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«Reply #4 on: July 15, 2013, 07:29:49 AM »
great
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nandbahu
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«Reply #5 on: July 15, 2013, 07:39:03 PM »
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