INTEZAR - In search of truth (Sci-fi psychological thrill romantic short story)

by ASIF on September 01, 2026, 12:40:56 AM
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ASIF
Shayari Qadrdaan
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Hello dosto swagat karta hoo, is saal ke dusri aur aakhri kahani par, dosto aap logo ne kareeban ek dashak se bhi zyada jo mujhe pyar aur support kiya, usse mujhe bahut khushi huyi, jis manch se maine kalam pakadna sikha aur jaha se kamyabi batori aur ek lekhak ka khitab jo aap logo ki dua se mila, uska main bahut shukraguzar hoo, ye dastan meri pehli sci fiction story hone jaa rahi hai, daur ab badal chuka hai ab typical horror aur thriller kahaniyo ka era guzar chuka, ab log aaj ke adhunik yug ki tarah kuch hatkar aur Naya content chahte hai halaki sci-fi purana genre hai, par is concept par ek adhunik kahani likhna bada challenge hai umeed karta hoo ye kahani aapko ant tak baandhe rakhegi, isme wohi lekhni hai thrill hai halka romance hai par kuch hatke hai toh wo hai iski kahani, umeed karta hoo Asif biswas ki likhi yaani meri ye aakhri kahani aap sabko pasand aaye, aapke keemati feedbacks ka hamesha intejar rahega ✍️[/color]


Disclaimer:- This story is a work of fiction; all characters, locations, incidents, and scientific concepts like parallel universes are purely products of the author's imagination, and any resemblance to real persons or events is entirely coincidental. Depictions of scientific theories, psychological distress, or life-threatening actions are used strictly for dramatic purposes within this Sci-Fi thriller and should not be construed as real-world medical advice or encouragement of unsafe practices. Neither the author nor the platform endorses self-harm or superstition, and readers are advised to approach the narrative purely as an entertaining work of creative fiction
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«Reply #1 on: September 01, 2026, 12:42:51 AM »

आंखें खुलीं तो नजर सीधे छत पर टंगे उस महंगे, झूमरनुमा झूमर पर पड़ी जिसकी चमक आंखों को चौंधिया रही थी। आरिफ ने हड़बड़ाकर बिस्तर से उठने की कोशिश की, लेकिन मखमली गद्दे की नरमाई ने उसे पल भर के लिए रोक लिया। उसने चारों तरफ देखा—वेल-फर्निश्ड कमरा, शीशे की नक्काशीदार मेज, उस पर रखी कीमती किताबें, और दूर कोने में रखी एक आलीशान अलमारी।

यह उसका कमरा नहीं था। वह दिल्ली की उस सीलन भरी, तंग 2BHK की कोठरी में सोया था, फिर यहाँ कैसे आया?
घबराहट में वह बेडरूम का दरवाजा खोलकर बाहर निकला। सामने एक विशाल लिविंग हॉल था जो किसी राजमहल जैसा लग रहा था। तभी एक मध्यम उम्र की नौकरानी हाथ में ट्रे लिए मुस्कुराती हुई करीब आई।

"आप उठ गए भैया? अमूमन तो आप काफी देर से उठते हैं, पर आज जल्दी जाग गए।"

आरिफ का माथा ठनका। "तुम कौन हो? मैं यहाँ कैसे आया? यह किसका घर है?"

नौकरानी खिलखिलाकर हंस पड़ी, "आप भी सुबह-सुबह मजाक करने लगते हैं! चलिए, तैयार हो जाइए, आपके ऑफिस जाने का समय हो रहा है।"

"मजाक नहीं कर रहा हूँ!" आरिफ चिल्लाया और अपना सिर पकड़कर बैठ गया। उसकी बदहवासी देखकर नौकरानी डर गई और उसने तुरंत एक फोन मिलाकर आरिफ को थमा दिया।

स्क्रीन पर वीडियो कॉल चल रही थी। स्क्रीन पर देखते ही आरिफ की सांसें थम गईं—उसके सगे पापा! वही चेहरा, वही मूंछें, लेकिन उनके चेहरे पर कंगाली की वो लकीरें नहीं थीं जो उसने कल रात तक देखी थीं।

आरिफ ने फोन छीना, "पापा! आप कहाँ हैं? मुझे यहाँ कौन लाया? आप लोग मुझे इस अनजान जगह क्यों छोड़ गए?"

उसके पिता ने अचरज भरी नजरों से देखा, "बेटा, तुम्हारा दिमाग तो ठीक है? यह तुम्हारा ही विला है! तुम जवान हो, तुम्हारी प्राइवेसी का ख्याल रखते हुए हमने तुम्हें यह घर दिया है। हम और तुम्हारी मम्मी दूसरे विला में रहते हैं।"

आरिफ सन्न रह गया। जो बाप एक-एक पैसे का हिसाब रखता था और उसे कभी नजरों से दूर नहीं होने देता था, वह आज उसे करोड़ों का विला नाम करके अलग रहने की बात कर रहा था?

"तुम्हें हुआ क्या है? ऐसी बहकी-बहकी बातें क्यों कर रहे हो?, वैसे तुम्हारी मॉम बिजी नहीं होतीं तो वो वहां जा सकती थीं, तुम अब बच्चे नहीं रहे हो जो ऐसा मजाक कर रहे हो, अगर कोई बात है या तबीयत खराब है तो फौरन हमारे फैमिली डॉक्टर को मैं तलब करता हूं, तुम सुन रहे हो ना?"

"ह..हां बाबा"आरिफ को जैसे उनकी कही बात दूर से सुनाई दे रही थी

"हम इस घर में कब से रह रहे हैं?" आरिफ ने फोन कटने के बाद नौकरानी से पूछा।

"तकरीबन दस सालों से भैया," नौकरानी ने सहजता से जवाब दिया।

"आपका जन्म तो इससे भी बड़े वाले मकान में हुआ था, जहाँ आपके मॉम-डैड रहते हैं।"

आरिफ का सिर घूमने लगा। दिल्ली शहर में 30 साल से उनका परिवार किराए पर था। पिता जिस जमीन की किस्त नहीं भर पा रहे थे, वह कंगाली, उसकी बेरोजगारी... क्या सब झूठ था?

तभी विला के मुख्य दरवाजे से एक सूट-बूट पहने शख्स ने प्रवेश किया। वह आरिफ का पारिवारिक चिकित्सक था। आरिफ को बेसुध और अजीब बातें करते देख पारिवारिक चिकित्सक ने नौकरानी की तरफ देखा।

"शायद सर की तबीयत ठीक नहीं है," नौकरानी बोली।
पारिवारिक चिकित्सक ने बिना देर किए आरिफ को संभाला, "सर, आपको आराम की सख्त जरूरत है।".....काफी समझाने-बुझाने और उसे काबू करने के बाद,  उसने तुरंत जेब से एक सीरिंज निकाली और आरिफ की बांह में एक इंजेक्शन लगा दिया।

आरिफ की पलकें भारी होने लगीं। कुछ ही देर में वह गहरी नींद में डूब गया। नींद में उसे भयानक ख्वाब आने लगे—वही पुरानी तंगहाली, वही छोटा सा कमरा, और उसमें पैसों को लेकर चीखते-चिल्लाते उसके मां-बाप!

जब उसकी आंख खुली, वह फिर उसी आलीशान बेड पर था। बाहर हॉल में पारिवारिक चिकित्सक नौकरानी से फुसफुसाकर कह रहा था, "लगता है किसी पुराने शॉक या चोट की वजह से इनके दिमाग की नसों में इशू हुआ है। पुरानी बातें भूल गए हैं। बिना हॉस्पिटलाइज किए इनका इलाज घर पर ही चलेगा। मैंने इनके मॉम-डैड को इन्फॉर्म कर दिया है।"....उसके बाद वह फैमिली डॉक्टर फिर आने का कहकर चला गया। उसके चले जाने तक के इंतजार के फौरन बाद आरिफ वापस अपने बिस्तर पर आकर लेट गया, तब तक वहां नौकरानी दोबारा उसका हाल देखने हाजिरी लगाने आई।

आरिफ ने उठकर नौकरानी से पूछा, "मॉम-डैड मुझसे मिलने क्यों नहीं आ रहे?"

"वे आपके साथ हमेशा नहीं रहते भैया," नौकरानी ने कहा।

आरिफ की रूह कांप गई। उसके मां-बाप तो उससे इतना प्यार करते थे कि उसकी नौकरी भी इसीलिए नहीं लगने देते थे कि कहीं उनका बेटा उनसे दूर न चला जाए। सस्पेंस का जाल अब उसे जकड़ रहा था।

"आप जब सोए हुए थे तो लेसी मैडम का फोन आया था, बहुत फिक्रमंद थीं। कह रही थीं कि आप उनसे एक बार बात कर लें, वैसे भी वह शायद परसों तक यहाँ आ जाएँगी।"

"ले..लेसी कौन?""अरे भैया लेसी! अमेरिका की मशहूर एक्ट्रेस। आपकी वो... आपकी जो विदेशी दोस्त हैं। क्या खूब हिंदी बोल लेती हैं, कहती हैं आपने सिखाया है। बहुत पसंद करती हैं आपको, हमेशा आपकी तारीफ करती रहती हैं। कहती हैं यह उनका दूसरा घर है। मैं तो कहती हूँ उनके आने से आपका अकेलापन दूर हो जाएगा, आप उनसे जल्द से जल्द शादी क्यों नहीं कर लेते?"

"मै..मैं"..... आरिफ कुछ समझ नहीं पा रहा था कि आखिर वह किस लेसी की बात कर रही थी।

"आप आराम कीजिए भैया, शायद आपने कोई बुरा सपना देखा है जिस वजह से आपकी तबीयत बिगड़ गई। कोई भी चीज़ की ज़रूरत हो, आप बेड के पास वाला स्विच बजा देना। अगर आपका ठीक ढंग से ध्यान नहीं रखा, तो आपके मां-बाबा मुझसे बहुत नाराज़ होंगे, खुद को संभालें।"

इतना कहकर वह चली गई। रात का खाना काफी एग्जॉटिक डिशेज से भरा था, ऐसा लज़ीज़ खाना उसने कभी देखा तक नहीं था। किसी तरह फिर भी उसने डिनर किया और वैसे ही आंखें खोले छत की तरफ एकटक देखता रहा। उसे नींद नहीं आ रही थी, वह अब भी इस हकीकत से हैरान था कि सबकुछ बदल सा गया था। वह सोना चाहता था, तो वो बुरे ख्वाब उसे सोने नहीं दे रहे थे।

आरिफ ने सिरहाने पर रखा फोन उठाया तो पाया कि वह उसका Oppo K10 नहीं, बल्कि एक iPhone था, जिसे उसने पहली दफा नोटिस नहीं किया था। क्या यह वाकई उसका अपना ही फोन था? उसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर 'लेसी' टाइप किया तो उसे पता चला कि वह वही लेसी थी जिसे कभी वह फॉलो किया करता था। उसकी ख्वाहिश थी कि उस जैसी गोरी मेम से उसकी शादी हो। वह पेशे से एक एडल्ट (पॉर्न) एक्ट्रेस थी, जिसके चलते वह उसकी तरफ आकर्षित हुआ था। पर यहाँ तो सब उल्टा था—वह उसे पहचानती थी, उसकी जिंदगी में शामिल थी, और तो और, वह उसके साथ रिलेशनशिप में थी! आखिर उनकी मुलाकात कब और कैसे हुई?लेसी अब कोई एडल्ट एक्ट्रेस नहीं रही थी, बल्कि वह कभी वैसी थी ही नहीं! उसके शुरुआत से लेकर अब तक के करियर की तमाम बातें विकिपीडिया (Wikipedia) पर मौजूद थीं। वह हॉलीवुड की एक मशहूर मुख्यधारा की नायिका थी, जिसने कभी किसी अश्लील या गंदी फिल्म में काम किया ही नहीं था। उसके ज़ेहन में यह बात खटकी कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? जबकि वह उन्हीं फिल्मों के चलते मशहूर हुई थी और उसी के चलते आरिफ उसे जान पाया था! वह रात न जाने जैसे-तैसे बीती, उसे पता ही न चला...

अगले दिन एक नौजवान विला में दाखिल हुआ। वह हर्ष था। आरिफ की पुरानी जिंदगी में हर्ष एक आवारा और नालायक दोस्त हुआ करता था। पर यहाँ हर्ष का रुतबा बदला हुआ था। बाद में उसे मालूम चला कि हर्ष अब वह पुराना वाला हर्ष नहीं रहा था। इस नई हकीकत में हर्ष का परिवार अचानक शहर के सबसे अमीर और रसूखदार परिवारों में शुमार हो चुका था। वह एक नामी रिसर्च इंस्टीट्यूट में बहुत बड़ा साइंटिस्ट बन चुका था।

"स्ट्रेस मत ले आरिफ," हर्ष ने उसके कंधे पर हाथ रखा।

"तू यहां?"

"मैं नहीं तो कौन? तू तो ऐसे देख रहा है जैसे मैं कितने साल बाद तुझसे मिल रहा हूं।"

आरिफ वाकई हैरान था कि वह कई साल बाद अपने बिछड़े दोस्त हर्ष को देख रहा था, पर हर्ष के चेहरे पर न कोई हैरानी थी, बल्कि उसके रुतबे और पहनावे को देख वह उसे किसी भी एंगल से हर्ष दिख नहीं रहा था। हर्ष, जो कभी सीधे-सादे कपड़ों में रहता था, आज बेहद महंगे और आलीशान लिबास में था। उसकी बातों में एक अलग ही आत्मविश्वास और रौब झलक रहा था, जो आरिफ के लिए बिल्कुल नया और अजनबी था।

"तेरे जो भी सवाल हैं, उनके जवाब मैं दूंगा। चल मेरे साथ।"

बाहर लॉन में सात-आठ महँगी गाड़ियां खड़ी थीं।

"ये किसकी गाड़ियां हैं?"....आरिफ ने पूछा

"अबे तेरे घर में खड़ी हैं तो तेरी ही होंगी ना!" हर्ष हंसा।

"मुझे तो गाड़ी चलानी भी नहीं आती".... आरिफ ने कांपती आवाज में कहा।

हर्ष ने एक कार का डैशबोर्ड खोलकर ड्राइविंग लाइसेंस निकाला, "यह देख, तेरा ही नाम है। और यह तेरा ड्राइविंग स्कूल का सर्टिफिकेट।"

आरिफ लाइसेंस पर अपनी तस्वीर और तमाम डिटेल्स पढ़कर हैरान था। उसका लाइसेंस कब बना था? उस पर लाइसेंस इश्यू की तारीख भी दर्ज थी। ड्राइविंग स्कूल का नाम भी दस्तावेजों में दर्ज था। वह हैरत में पड़ गया, फिर हर्ष के कहने पर वह अपनी कही जाने वाली एक गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठ गया। उसने कभी सात-आठ लाख की गाड़ी का सपना देखा था और सोचता था कि गाड़ी सीख भी ली तो ड्राइवर ही बनेगा। लेकिन आज करोड़ों की गाड़ी सामने थी। और सबसे ना-ऐतबार करने वाली बात यह थी कि यह तमाम गाड़ी उसकी अपनी मल्कियत थी। उसने डरते-डरते स्टेयरिंग पर हाथ रखा।

और फिर एक चमत्कार हुआ।

आरिफ के हाथों को किसी निर्देश की जरूरत नहीं पड़ी। उसके पैरों ने खुद-ब-खुद क्लच और एक्सीलेटर पहचाना, हाथों ने गियर बदला, चाबी घूमी और इंजन की गरगराहट के साथ गाड़ी सड़क पर फर्राटे भरने लगी। उसकी 'मसल मेमोरी' को सब याद था, भले ही उसके दिमाग को कुछ याद न हो!

"देख, तुझे सब आता है," हर्ष मुस्कुराया। "तेरा दिमाग बस ज्यादा स्ट्रेस में है।"

कुछ घड़ी चलने के बाद उसने गाड़ी हर्ष के बताए एक सड़क के किनारे रोकी, वे एक बेहद महंगे फाइव-स्टार होटल में रुके।

"इतना महंगा होटल?".....आरिफ उस होटल को देखते हुए अवाक कहने लगा.

"तेरे जैसा देसी बिल गेट्स खुद को गरीब कहे तो गरीब को गाली! भूल गया, यहीं तो चाय पीने अक्सर आते हैं हम। अब चल गाड़ी से तो उतर, डर मत बिल मैं पे कर देता हूं, अब खुश?"....आरिफ कुछ समझ नहीं पा रहा था। मतलब वह यहां अक्सर आता था? उसका ऐसा स्वागत हुआ जैसे वह वहां का कोई नया कस्टमर नहीं था। होटल के दरबान से लेकर मैनेजर तक सब उसे नाम से पुकार रहे थे और झुककर सलाम कर रहे थे। आरिफ ने सहमे हुए कदमों से कदम आगे बढ़ाए। उसे लग रहा था जैसे वह किसी और की जिंदगी जी रहा है।

चाय पीते वक्त आरिफ को लू लगी और वह वॉशरूम गया। बड़े से आईने में उसने जब खुद को देखा तो चौंक गया। दुबला-पतला आरिफ गायब था—आईने में चौड़े कंधे, मस्कुलर बॉडी और लंबी कद-काठी वाला एक गठीला मर्द खड़ा था। यह वही फिजीक थी जिसकी वह बंद आंखों से कल्पना किया करता था।

वापस आकर आरिफ ने हर्ष से कहा, "हर्ष, सच बता हम मिले कब? हम तो बिछड़ गए थे ना?"

"बिछड़े कब थे भाई? हम तो हमेशा साथ थे," हर्ष ने उसकी हड़बड़ाहट को देखते हुए चौंककर कहा।

"और वह लड़की?" आरिफ की आवाज धीमी हो गई। "नौकरानी कह रही थी कि लेसी मेरी गर्लफ्रेंड है? हॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस लेसी? मैं तो सिर्फ उसकी क्लिप्स देखा करता था, तू जानता है ना वह असल में कैसी फिल्मों में काम करती थी?...हम तो एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। उसने तो कभी मेरी सूरत तक नहीं देखी होगी, हालांकि कई दफ़ा उसके इंस्टा हैंडल पर कमेंट किया पर उसने तो कभी जवाब भी नहीं दिया था, और आज एकदम से वो मुझे जानती है? मेरे साथ रिलेशनशिप में है? मुझे कुछ नहीं समझ आ रहा!,वह मुझसे प्यार कैसे कर सकती है?"

हर्ष हंसा, "तेरा अमेरिका में एक बिजनेस मीटिंग था। तू बहुत बड़ी मर्चेंडाइजिंग कंपनी का चेयरमैन और MD है। तेरे कोल्ड ड्रिंक्स के ब्रांड्स चलते हैं। लेसी वहीं तुझ पर फिदा हुई थी। तूने खुद ही तो मुझे वीडियो चैट पर बताया था कि वह तुझे पसंद करती है और अब तू उसके साथ रिलेशनशिप बनाना चाहता है।"

"यह झूठ है! यह कोई सपना है!" आरिफ चिल्लाया।

हर्ष ने तुरंत टेबल पर रखी खोलती हुई कॉफी में आरिफ की उंगली डुबो दी।

"आह!" आरिफ दर्द से चीख पड़ा।

"अब बता, सपना है या हकीकत?" हर्ष ने तीखे स्वर में पूछा।

आरिफ जलती उंगली सहलाता रह गया। दर्द असली था, यानी यह दुनिया भी असली थी। वह खामोश वैसे ही बैठा रहा, उसे अब भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब हो क्या रहा था?

To be continued...

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«Reply #2 on: September 01, 2026, 12:43:42 AM »
होटल की मेज पर चाय की चुस्की लेते हुए हर्ष जब अपनी बड़ी रिसर्च लैब, ढाका में अपनी जमाई धाक और अपने ठाट-बाट के किस्से सुना रहा था, तो आरिफ उसे एकटक देखता ही रह गया।

​आरिफ के दिमाग के किसी कोने में एक पुरानी धुंधली तस्वीर कौंध उठी। यूपी का रहने वाला यह वही हर्ष था, जिसे बंगाली भाषा का एक शब्द तक समझ नहीं आता था। पर उसकी दीवानगी का आलम यह था कि वह दिन-रात बंगाली फिल्में देखता था, वहाँ के एक्टर्स और हीरोइनों की तारीफों के कसीदे पढ़ता था और पुरानी दुनिया में अक्सर आरिफ के गले में बांह डालकर कहा करता था—

"देखना भाई, एक दिन ये दिल्ली-यूपी का झंझट छोड़कर मैं हमेशा-हमेशा के लिए बंगाल में जाकर बस जाऊंगा। वहीं अपनी दुनिया बसाऊंगा!"

​तब आरिफ उसकी इस बात पर हंसकर उसे औकात याद दिला दिया करता था। पर आज...आज वही यूपी का लड़का बंगाल (ढाका) के सबसे बड़े साइंटिस्ट का रुतबा लिए उसके सामने बैठा था।

चाय खत्म करने के बाद हर्ष ने कहा, "अच्छा अब चल मैं तुझे एक जगह ले चलता हूँ, हो सकता है वहाँ जाकर तुझे सबकुछ याद आ जाए।"

"क..कहाँ पर?"

"अरे पहले चल तो सही।"

दोनों वापस फाइव स्टार होटल से बाहर आए, गाड़ी में बैठे। इस बार हर्ष ड्राइव करता हुआ उसे एक बड़ी सी बिल्डिंग के सामने ले आया। दोनों गाड़ी से बाहर उतरे। बिल्डिंग की छत पर बने बड़े से नियॉन साइनबोर्ड पर लिखा था "SHAIKH ENTERPRISES"।

"अब चल भी"...हर्ष ने उसके ध्यान को तोड़ते हुए उसका बाज़ू खींचा। वह दोनों अंदर उस बड़ी गगनचुंबी इमारत में दाखिल हुए।

हर्ष उसे उसकी कंपनी की गगनचुंबी इमारत में ले गया। टॉप फ्लोर के भव्य केबिन में जैसे ही आरिफ ने कदम रखा, सैकड़ों कर्मचारी अपनी कुर्सियों से सम्मान में खड़े हो गए। ऐसा लग रहा था जैसे वो लोग उसे कितने सालों से जानते हों। हर्ष ने उसे आहिस्ते से बताया कि यह तेरी कंपनी है और यह सब तेरे एम्प्लॉइज़ (कर्मचारी) हैं। आरिफ को कुछ समझ नहीं आया। वह अपने निजी केबिन में दाखिल हुआ जहाँ से पूरा शहर दिखता था।

"य..यह सब मेरा है? यह ऑफिस, यह कंपनी?"

"हाँ भाई हाँ।"

"और मेरे मॉम-डैड?" आरिफ ने खिड़की से शहर को देखते हुए पूछा।

"वे अपने कामों में बिजी रहते हैं। यह देख," हर्ष ने एक मैगजीन आगे बढ़ाई।

मैगजीन के कवर पेज पर उसकी माँ योगा पोज में थीं—शहर की सबसे फिट महिला! वो मैगज़ीन कवर पे थे, यही आरिफ को बेहद अजीब और चौंकाने वाला लग रहा था। ना ही वो उसके माँ-बाबा दिख रहे थे और ना ही जहाँ वो खड़ा था, यह ज़िंदगी उसे अपनी हक़ीक़त न लग रही थी।

उसके पिता एक टैलेंटेड बिजनेसमैन की तरह दिख रहे थे। आरिफ का दिल बैठने लगा। पुरानी दुनिया में उसकी माँ पैसों की कमी से बीमारियों से सड़ रही थी और पिता एक लापरवाह इंसान थे। यहाँ सब कुछ बिल्कुल उलट था।

"मेरे डैड ने मुझे यह कंपनी सौंप दी? और वो कहीं और अपना बिजनेस संभालते हैं? पर इतने पैसे हमारे पास आए कैसे? मेरे फादर तो महज़ एक फैशन एक्सपोर्ट फैक्ट्री में एक ऊंचे दर्ज़े के महज़ डिज़ाइनर थे, और आज इतनी बड़ी कंपनी?"

"तेरे दादा ने जो संपत्ति दी उससे तेरे बाप ने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया। तेरी अमेरिका से एमबीए (MBA) की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद तूने यहाँ आकर अपनी खुद की कंपनी अपने दम पे खोली और आज तू करोड़ों का मालिक है। और यही नहीं, ऐसे कई ब्रांचेस देश के अलग-अलग हिस्सों में भी हैं, तुम्हारी कंपनी को अच्छा-खासा मुनाफ़ा मिलता है।"

"प..पर मैं अमेरिका तो कभी पढ़ने जा ही नहीं सकता था? और मेरे दादा... वो तो कुछ देकर नहीं गुज़रे थे, उल्टे गरीबी के चलते हमारा पूरा परिवार दिल्ली आया था भारी कर्ज़ के चलते।"

"हाहाहा यार कहानी अच्छी है पर तेरी ज़िंदगी से कतई मैच नहीं करती। अब छोड़ यह सब बात, और भी मन में सवाल हैं तो पूछ।"

वह सवाल करता भी तो क्या करता? तब उसे अपने फोन का ख्याल आया, क्या मालूम उससे उसे कुछ सबूत मिल जाए? हर्ष से किसी तरह पीछा छुड़ाकर वह अपने घर दोपहर बाद तक लौटा।

घर लौटकर आरिफ ने अपना फोन खंगाला। फेसबुक पर हजारों मैसेंजर रिक्वेस्ट थीं। तभी नौकरानी ने आकर गुलाबों का एक खूबसूरत बुके थमाया।

उस पर एक चिट्ठी थी—और नीचे नाम लिखा था: सईदा।

आरिफ का दिल एक पल को धड़कना भूल गया। सईदा! बांग्लादेश की वही लड़की जिसे वह अपनी पुरानी जिंदगी में पागलों की तरह एकतरफा चाहता था, पर कभी पा न सका।

"यह उपहार कहाँ से आया?"

"बांग्लादेश से आया है भैया। ऐसे तोहफे अक्सर आते हैं, आप हमेशा इग्नोर कर देते थे," नौकरानी ने बताया।

आरिफ चौंके बिना नहीं रह सका, इसका मतलब लेसी की तरह सईदा भी उसकी ज़िंदगी में अब शामिल थी? उसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स चेक किए तो उसे हैरानी थी; उसमें उसकी पुरानी से लेकर नई तस्वीरें बिल्कुल अलग-थलग थीं। कोई भी तस्वीर उसने कभी खिंचवाई नहीं थी लेकिन वो तमाम तस्वीरें कई वक्तों से वहाँ मौजूद थीं। हैरानी की बात थी कि फ्रेंड लिस्ट और रिक्वेस्ट इंस्टाग्राम और फेसबुक दोनों से भरी पड़ी थी। वह पॉपुलर था और लोग उसे अच्छा-खासा जानते थे। और हैरत की बात यह थी कि वह उसकी वेरिफाइड ब्लू मार्क आईडी थी, जबकि ऐसी कोई ब्लू मार्क उसने अपनी आईडी पे कभी लगवाई नहीं थी। तभी अचानक वह हड़बड़ाया।सईदा का अकाउंट उसकी फ्रेंड लिस्ट और फॉलोअर्स अकाउंट्स में भी मौजूद था। मतलब जिसे वह आज तक तलाश नहीं कर पाया, देख नहीं पाया, वही लड़की आज उसके सामने हूबहू मौजूद थी। उसकी तस्वीरें थोड़ी अलग थीं पर यह वही पुरानी दिलकश अदाओं वाली तस्वीरें थीं, जब कभी उसे देखकर उसने उसे अपना दिल दे बैठा था।

उसने उस गुलाबों से सजे गुलदस्ते को एक बार फिर देखा, वैसे ही ढेरों तोहफे उसके कमरे के दूसरी तरफ रखे थे, जहाँ छानबीन करने पर उसे पता चला कि हर तोहफे पर उसके और स्यैदा का नाम लिखा हुआ था। एक जगह एक शायरी थी जो बांग्ला में लिखी थी,

"तुम्हारे बिना मेरी किस्मत कहाँ?
 हम ज़रूर मिलेंगे एक दिन इसी जहाँ।
"

इस बार आरिफ ने उस तोहफे की एक तस्वीर ली और उसे अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा:
"I want to meet u"

अगले ही दिन विला के सामने एक लग्जरी कार रुकी और उसमें से लेसी उतरी। वही हॉलीवुड एक्ट्रेस! वह सीधे अंदर आते ही आरिफ से लिपट गई। आरिफ समझ नहीं पा रहा था, वही हूबहू चेहरा... यह तो वही लेसी थी! वही गेहुँए बाल, वही गोरा चेहरा, नीली आँखें और काफी हद तक वह उसकी भाषा में अटक-अटककर उससे बात कर रही थी। आरिफ के गले लिपटते ही उसे उसके बदन से आती तेज़ महँगी परफ्यूम की गंध महसूस हुई। आरिफ का धड़कता दिल उसे कानों तक सुनाई दे रहा था। यह ख्वाब है या हकीकत,एक के बाद एक अविश्वसनीय चीज़ें घट रही थीं।

"आरिफ! मुझे पता चला तुम्हारी याददाश्त के बारे में। डोंट वरी, तुम ठीक हो जाओगे। चलो मेरे साथ स्विट्जरलैंड चलते हैं।"

"स्विट्जरलैंड? इतनी आसानी से?" आरिफ ने पूछा।

"इसमें हैरानी की क्या बात है? तुम तो ऐसे चौंक रहे हो जैसे स्विट्ज़रलैंड तुम पहली बार जा रहे हो। जबकि कितनी ही दफ़ा हम स्विट्ज़रलैंड तो क्या, विदेश की कितनी ही खूबसूरत जगहों पर गए हैं। तुम्हारे पास ड्यूल सिटीजनशिप है आरिफ! तुम्हारे रसूख के आगे कोई डिप्लोमेटिक प्रॉब्लम नहीं आती," लेसी ने उसके गाल चूमते हुए कहा।

जब आरिफ ने उससे पूछा कि वह हॉलीवुड एक्ट्रेस कैसे बनी, तो लेसी ने बताया कि छोटे-मोटे रोल्स के बाद उसे क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म मिली और आज वह ऑस्कर के लिए नॉमिनेटेड है। आरिफ मन ही मन चुप रहा, क्योंकि उसकी पुरानी यादों में लेसी का अतीत कुछ और ही था।

"अब ये सब बातें छोड़ो और चलो मेरे साथ।"....न चाहते हुए भी आरिफ लेसी के साथ खिंचता चला गया। लेसी उसकी बाजू थामे उसे गाड़ी में बिठाते हुए खुद ड्राइविंग सीट पर आ गईl

जब लेसी उसे कार में घुमाने ले गई, तो आरिफ का सिर फिर चकराया। आज जब उसने उस शहर को बारीकी से देखा जहाँ वह रह रहा था, तब उसे अहसास हुआ कि यह दिल्ली था ही नहीं। यह ढाका शहर था! लेकिन वैसा ढाका नहीं जैसा इतिहास में था—यह आसमान को छूती इमारतों (Sky-scrapers) और विशाल समुद्री बीचेस से घिरा था और लेसी के मुताबिक अब एक अलग आज़ाद देश बन चुका था। एक बेहद आधुनिक आजाद देश। लेसी ने बताया कि दुनिया के बड़े-अमीर देश जंग की वजह से गरीब हो चुके हैं, और जिन्हें कभी गरीब माना जाता था, वे आज तरक्की के शिखर पर हैं।

"अच्छा हम मिले कैसे थे?"

"तुम..हें पक्का कुछ याद नहीं?"..... लेसी ने उसके बाल सहलाए, उसे फिक्रमंद नज़रों से देखते हुए पूछा।

"बताओ ना?"

"तुम अमेरिका आए थे मीटिंग में, उस दौरान मैं शूट के लिए सैन फ्रांसिस्को आई हुई थी। फॉलो तो मैं तुम्हें कई वक्तों से कर रही थी, तुम्हारी इंस्टाग्राम पर मशहूर बिजनेस के चर्चे और तुम्हें अक्सर फोटोज में देखा करती थी। फिर वही सैन फ्रांसिस्को में इत्तेफाक कहो हम मिले थे, ब्रिज के पास वो जो पहाड़ी जगह है याद आया? यह देखो हमारी पहली तस्वीर, जानते हो इसे कितना मैंने संभाल के रखा है।"

तस्वीर देखकर वाकई आरिफ हैरान था, वह तो कभी अमेरिका गया तक नहीं था और आज यह दूसरा शॉक था उसके लिए।

"मम्मी-पापा से मिली, कह तो रहे थे कि तुम मुझसे शादी करना चाहते हो? मैंने ही अभी वक्त मांगा है पर अब और नहीं, हम जल्द ही शादी कर लेंगे, वेन्यू मेरी मॉम ने देख लिया है। जोहान्सबर्ग में हम शादी कर लेंगे, व्हाट डू यू थिंक?"

आरिफ बिल्कुल जैसे किसी गहरे ज़ेहन में डूबा था, लेसी ने उसे झिंझोड़ा, "आ..आरिफ, आरिफ यू ओके?"

"ह..हाँ मैं ठीक हूँ।"

"तुम मेरे साथ अमेरिका चलो, आई विल शो यू टू द बेस्ट डॉक्टर्स।"

"ज़रूरत नहीं पड़ेगी, मैं ठीक हूँ।"

वो पूरी शाम शहर में लॉन्ग ड्राइव करते रहे, महँगे होटल्स में उन्होंने खाना खाया और फिर अपने बंगले पर लेसी को लाकर, आरिफ ने उससे कुछ वक्त अकेले रहने का मांगा और अपने कमरे में आकर बंद हो गया। वह अभी सोच ही रहा था तब उसे ख्याल आया कि उसने ट्रैफिक में एक जाने-पहचाने चेहरे को देखा था जो उसके पुरानी ज़िंदगी से जैसे ताल्लुक रखता था, और वह था सईदा का भूतपूर्व शौहर दिगोन्तो।

आरिफ का सिर दर्द से फटने लगा। उसने सईदा के मंगेतर दिगंतो को ढूंढने का फैसला किया। पुरानी दुनिया में दिगंतो एक घमंडी सॉफ्टवेयर इंजीनियर था वह स्येदा का बॉयफ्रेंड बताया जाता था क्योंकि कई अनगिनत फेक आईडी और तस्वीरों में स्येदा उसके साथ हमेशा मौजूद रहती थी। बाद में उसे छानबीन कर पता चला था कि दिगंतो उसका होने वाला पति था, लेकिन किसी वजह से दोनों का रिश्ता टूट गया था। यह बात उसे खुद दिगंतो के इंस्टाग्राम फॉलो करने के बाद पता चली थी। तब उसे अहसास हुआ कि दिगंतो असल में स्येदा के साथ रह नहीं रहा था बल्कि उसे कब का छोड़ चुका था और स्येदा कहाँ गुमनाम थी, यह बात उसे भी नहीं मालूम थी। उसने फिर भी ज़्यादा स्येदा की खोजबीन करने के चलते आरिफ को बेइज़्ज़त किया था। उसने तुरंत गूगल किया और उसे एक नामी प्राइवेट डिटेक्टिव फर्म का नंबर मिला। उसने फौरन एक प्राइवेट डिटेक्टिव हायर किया।

आधे दिन में डिटेक्टिव ने दिगंतो को खोज निकाला। जब आरिफ उससे मिला तो दंग रह गया। इस दुनिया में दिगंतो एक बेहद तंगहाल, बेरोजगार और किराए के कमरे में रहने वाला लाचार इंसान था। वह आरिफ को देखते ही हाथ जोड़ने लगा।

"क्या तुम सईदा को जानते हो?" आरिफ ने पूछा।

"सईदा? कौन सईदा सर? मैंने तो कभी इस नाम की लड़की की सूरत भी नहीं देखी," दिगंतो ने मासूमियत से कहा।

"क्या तुम मुझे जानते नहीं? मैं वही आरिफ हूँ जिसे तुमने बेइज़्ज़त किया था। मैं स्येदा के बारे में तुमसे जानने की कोशिश कर रहा था।"

"मैंने तो सिर्फ आपको इंस्टाग्राम पर और न्यूज़ चैनलों पर देखा है। मैं आपकी भला बेइज़्ज़ती कैसे कर सकता हूँ? आप तो देख ही सकते हैं कि मेरी क्या हैसियत है।"....आरिफ ने देखा कि उसके कमरे के चारों तरफ वाकई उसके घर की हालत बहुत तंगहाली से गुज़र रही थी। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वह वही दिगंतो था जो कभी रईस और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के ओहदे पर था।"

"फिर आरिफ ने उसे स्येदा की तस्वीर दिखाई
 
"इसे पहचानते हो?''.... लेकिन उसने साफ इंकार कर दिया।
 
फिर उसने कहा, "वाकई क्या यह आपकी गर्लफ्रेंड है? अगर है तो आप दोनों की जोड़ी बहुत ही अच्छी लगेगी। मैं दुआ करूँगा कि आप दोनों जल्द से जल्द एक हो जाएं।"..... आरिफ जैसे उसे अवाक नज़रों से बस देखता रह गया। इसके बाद वह कुछ नहीं कह सका और वहाँ से दौड़कर निकल गया।"

आरिफ स्तब्ध रह गया। पुरानी दुनिया में उसने अक्सर बद्दुआ मांगी थी कि सईदा और दिगंतो कभी एक न हों। आज इस दुनिया में उसकी वह चाहत भी सच हो चुकी थी, पर उसे कोई खुशी नहीं मिल रही थी।

आरिफ भागता हुआ हर्ष के पास पहुँचा। "हर्ष, मुझे सच बता! यह क्या मायाजाल है?"

''यार आज तो मुझे छुट्टी मिली थी और तू मेरी शाम खराब करने आ गया। अच्छा माफ़ कर, मज़ाक कर रहा हूँ। क्या बात है, तू इतना टेंशन में क्यों है?"..... वह आरिफ को हैरानी भरी नज़रों से देखने लगा। आरिफ बिल्कुल हड़बड़ाया हुआ था।

"देख हर्ष, तू मुझसे ज़रूर कुछ छुपा रहा है। मेरी मदद कर, अगर तूने मेरी मदद नहीं की तो मैं वाकई पागल हो जाऊँगा। मुझे किसी के पास ले चल। तूने तो मनोविज्ञान की पढ़ाई कर भी रखी है ना? तू मेरी स्थिति को समझता है। तू मुझे कहीं ना कहीं ले चल जहाँ मुझे मेरे सारे सवालों का कोई ना कोई जवाब दे दे।" हर्ष समझ चुका था। वह संजीदा हुआ और उसने फ़ैसला किया कि अब उसे अपने सबसे ख़ास इंसान के पास लेकर चलना पड़ेगा।"

हर्ष उसे प्रोफेसर क्लार्क के पास ले गया, जो कॉस्मिक और एस्ट्रोनॉमी के दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक थे। आरिफ ने उन्हें अपनी पूरी आपबीती सुनाई—कैसे उसकी पुरानी दुनिया और इस दुनिया में सब कुछ बिल्कुल उल्टा है।

प्रोफेसर क्लार्क ने एक ठंडी सांस ली,पहले तो प्रोफेसर क्लार्क को लगा कि वह वाकई कुछ बहकी-बहकी बातें कर रहा है, लेकिन जब उन्होंने हर्ष की तरफ देखा जो कि बिल्कुल संजीदा खड़ा उन्हें ही देख रहा था, तब वह समझे कि मामला वाकई सीरियस है। वह चुपचाप आगे बढ़े,लैब की एक मशीन ऑन की।

"आरिफ," प्रोफेसर क्लार्क ने कहा..."फिल्मों जैसा मल्टीवर्स नहीं होता। लेकिन बिग बैंग के समय ब्रह्मांड के दो हिस्से बने थे—एक ही सिक्के के दो पहलू! इसे हम पैरेलल यूनिवर्स (Parallel Universe) कहते हैं। यह दुनिया जिसे तुम अपनी दुनिया कहते हो, तुम्हारी उस पुरानी दुनिया का ठीक उल्टा 'आईना' है।,

हमारी इस दुनिया में इस ज़माने तक विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है और हम यह बात जान चुके हैं कि इस कायनात का एक हिस्सा बँटा हुआ है। मतलब एक अलग दुनिया, जो कि बिल्कुल इस दुनिया के विपरीत है। लेकिन हम उस दुनिया में चाहकर भी नहीं जा सकते, पर वहाँ क्या हो रहा है, यह देख सकते हैं। लेकिन बहुत कम ही ऐसे लोग हैं जो इस दुनिया को देख सकते हैं। लेकिन जैसा तुम कह रहे हो, बिना किसी यंत्र या किसी चीज़ के उस दुनिया को जान पाना वाकई एक खुदाई करिश्मे से बढ़कर है। हालाँकि हमारी दुनिया में खुदा, भगवान और ईश्वर पर अब लोग नाम का ही यकीन करते हैं। विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है कि ये सब बातें उन्हें दकियानूसी लगती हैं, लेकिन कहीं ना कहीं हो सकता है इसमें सच्चाई हो।"

"क्या मैं उस दुनिया में वापस जा सकता हूँ?" आरिफ ने तड़पकर पूछा।

"शीशे के उस पार देखना आसान है, पर पार जाना नामुमकिन। जबरदस्ती करोगे तो शीशा टूट जाएगा," क्लार्क ने कहा।

 उन्होंने आरिफ को एक खास दवा दी, "यह दवाई देख रहे हो? यह है मेरी सालों की मेहनत का नतीजा। सिर्फ मेरी नहीं, दुनिया भर के जितने भी वैज्ञानिक हैं, उनकी कड़ी मेहनत का यह नतीजा है जो साइंस की दुनिया में एक नए अध्याय को लिख रहा है। जिसने एक अलग ही दरवाज़े को खोल दिया है, जिसके चलते आज विज्ञान तरक्की के उस पैमाने पर है जिसके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते थे। इस दवा की खासियत यह है कि इसको पीने के बाद तुम ज़रूर बेहोश हो जाओगे, लेकिन तुम ज़िंदा रहोगे और तुम्हारे सब वाइटल ऑर्गन्स (महत्वपूर्ण अंग) सब ज़िंदा रहेंगे। पर धीरे-धीरे तुम पर जैसे एक मौत तारी हो जाएगी और ना चाहते हुए भी तुम्हारे जिस्म से तुम्हारी रूह निकलने लगेगी। शायद यह बात तुम्हें मज़ाकिया लगे, पर इस दुनिया में रूह पर लोग यकीन करते हैं। विज्ञान यकीन करता है और मानता है कि इस दुनिया में रूह के बिना इंसान बेजान है।"....आरिफ बेहद ध्यान से उनकी बात सुन रहा था और वह कहते जा रहे थे।
 
"यह तुम्हारे शरीर को शांत कर देगी और इस यंत्र पर तुम्हारे लेटे जिस्मों पर कई तारें लगा दी जाएँगी। डरो नहीं, इससे तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। यह तुम्हारे पल्स रेट, हार्ट की गति और शरीर का तापमान बताएगा। इसी तार के कुछ ट्रांसमीटर्स तुम्हारे जिस्म से उस एनर्जी—जिसे हम अपनी भाषा में रूह कहते हैं—वह इससे गुज़रेगी और ब्रह्मांड के उस डायमेंशन (आयाम) में तुम्हें दाखिल कर देगी, जो रास्ता तुम्हारे कहे मुताबिक उस उल्टी दुनिया की तरफ जाता है।ट्रांसमीटर के जरिए तुम्हारी रूह (Soul) कुछ पलों के लिए उस पार देख सकेगी।"

फिर वह उस यंत्र जैसी सोफा चेयर पर लेट गया। उसके बाद हर्ष और प्रोफेसर क्लार्क ने मिलकर उसके नंगे जिस्म पर वे तारें लगा दीं। एक इंजेक्शन उसकी नस में पुश कर दिया गया, जिससे वह तरल पदार्थ उसके जिस्म में दाखिल हो। तब उसे कैप्सूल दी गई, जिस दवाई को उसने बेझिझक खा लिया।
कुछ देर आँखें मूँदते हुए लेटे-लेटे ही जैसे आरिफ की पलकें भारी हुईं और वह सो गया।
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«Reply #3 on: September 01, 2026, 12:44:54 AM »
प्रोफेसर क्लार्क ने देखा और हर्ष की भी नज़र पड़ी कि मशीन अब बिल्कुल नॉर्मल तरीके से ज़्यादा तेज़ी से चलने लगी थी, उसका आत्मिक अस्तित्व उड़ा ऐसा लग रहा था जैसे उसका शरीर हवा में कहीं तैर रहा हो और वह इतनी तेज़ी से ऊँचाई की तरफ जाने लगा मानो जैसे कि वह अब के अब बस गिरा। उसे समझ नहीं आया था कि उसके आसपास क्या हो रहा है। अजीब सी गूँ-गूँ करती आवाज़ थी, एक अजीब सा शोर था। फिर उसके बाद उसकी बंद आँखों के आगे ही एक रोशनी सी चमकी। उसके बाद उसने अपनी आँखें खोलीं तो देखा कि वह आसमान में जैसे तैर रहा था। चारों तरफ अंधेरा था। दूर-दूर तारे उसे नज़र आ रहे थे और तभी उसे एक बवंडर सा दिखा। वह बवंडर नहीं, एक ऐसा पोर्टल था जो उसके करीब ही आ रहा था। उसे दिखने में वह कोई मैनहोल सा लगा, वह उस पार पहुँचा।और देखते-ही-देखते वह चुंबकीय आकर्षण की वजह से उसके अंदर खिंचता चला गया। जैसे ही वह उसके अंदर खिंचा, तो किसी गहरे काले कुएँ की खाई की भाँति वह अंदर गिरता चला गया और ठीक तभी उसे अपने कानों में कहीं जानी-पहचानी आवाज़ सुनाई देने लगी। उसने पाया कि वह अपने उसी पुराने जर्जर किराए के मकान के कमरे में बेहोश पड़ा था। वहाँ उसने देखा—वही तंग कमरा, बिखरा हुआ सामान, रोते हुए मां-बाप... लेकिन उस कमरे में आरिफ का शरीर नहीं था!, अचानक जैसे वह फिर आसमान की तरफ खींचता चला गया, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह जैसे छत से आर-पार सा हुआ, तभी उसे आसमान में खुद को कोई खींचता हुआ महसूस हुआ और वह डर से चीख उठा। उसका पूरा शरीर कांपा और फिर...

जब उसे होश आया,तो क्लार्क और हर्ष दोनों मिलकर उसके जिस्म से तार नोच-नोच कर उसे होश में ला रहे थे। वह जग चुका था लेकिन उसका पूरा शरीर थर-थर काँप रहा था।

 "क्या देखा तुमने?' आरिफ ने सच-सच सब कुछ प्रोफेसर क्लार्क को बताया। हर्ष भी सुन रहा था।"

"माय गॉड, यह एक करिश्मा है! हर्ष, तुम्हारा दोस्त वाकई जो कुछ उसने बताया है, यह बिल्कुल सच साबित होता है कि वाकई वह उस दुनिया के बारे में सब कुछ न सिर्फ जानता है, बल्कि उस दुनिया का एक हिस्सा भी है। अब कोई बात छुपाने से कुछ नहीं रहा।"

हर्ष खामोश था पर गंभीर, वहीं आरिफ इस बात को समझ नहीं सका।"
 
जब वह पूरी तरह नॉर्मल हुआ, तो उसके पानी पीने के बाद प्रोफेसर क्लार्क ने उसे एक ब्रह्मांड का सबसे खौफनाक नियम बताया:

"Inverse Law (उल्टे आईने का नियम)। जो वहाँ है, यहाँ उसका उल्टा है। अगर वहाँ तुम गरीब थे, यहाँ अमीर हो। अगर वहाँ कोई तुमसे नफरत करता था, यहाँ प्यार करता है। और...अगर उस दुनिया में तुम्हारी जिंदगी खत्म हो चुकी है, तो इस दुनिया में तुम जिंदा हो!"

हर्ष की आंखों में आंसू आ गए। उसने आरिफ का हाथ थामा, "आरिफ, अब सच सुन ले। इस दुनिया का असली आरिफ कुछ दिन पहले एक भयानक कार एक्सीडेंट में मारा जा चुका था। मैंने प्रोफेसर क्लार्क की मदद से उसकी बॉडी को प्रिजर्व रखा था। मुझे नहीं पता कैसे, लेकिन तुम्हारी पुरानी दुनिया की रूह इस खाली पड़े शरीर में दाखिल हो गई!"

आरिफ सन्न रह गया। उसकी अधूरी ख्वाइशों और लालच ने उसकी रूह को इस समानांतर दुनिया के शरीर में खींच लिया था!

तभी आरिफ के दिमाग में एक बिजली कौंधी।

"हर्ष! अगर इस दुनिया में सब कुछ मेरी पुरानी दुनिया का उल्टा है... तो सईदा?"

"क्या सईदा?" हर्ष ने पूछा।

"पुरानी दुनिया में मैं सईदा के लिए पागल था और उसके पार्टनर को मारना चाहता था! उस दुनिया में मैं सायदा तक पहुँच नहीं पाया, लेकिन इस दुनिया में ठीक इसका उल्टा हुआ। सायदा न सिर्फ मेरे तक पहुँच सकी, बल्कि वह मुझे तोहफ़े भेजती है।इसका मतलब!"

"इसका मतलब क्या, आरिफ?"....हर्ष ने भौंचक्के से सवाल किया

"इसका मतलब यह कि सायदा ठीक वैसे ही जुनूनी और अपनी दीवानगी की हद पार करेगी, जैसा मैं करना चाहता था। अगर मैं उस ज़िंदगी में नाकामयाब रहा, उसके शहर यानी जिस शहर में अभी मैं हूँ, ढाका पहुँच नहीं पाया, लेकिन वह इस शहर यानी इस दुनिया में, मेरे तक पहुँच बना लेगी। वह मुझ तक पहुँच जाएगी और मुझसे जो भी जुड़ा हो, जो भी मुझसे मोहब्बत करता हो, वह उसे नुकसान पहुँचाएगी ही पहुँचाएगी। इस दुनिया में सईदा मेरे लिए पागल है... इसका मतलब वह लेसी को जान से मार देगी!" आरिफ चीखा।

वे दोनों बदहवास होकर आनन-फानन में वे लैब से बाहर निकले उनकी गाड़ी विला की तरफ भागी। विला का दरवाजा अंदर से बंद था। अंदर से लेसी की चीख सुनाई दी! हर्ष फोन पर व्यस्त हो गया जबकि आरिफ कंपाउंड की तरफ लपका।

उसने अपने विला के कंपाउंड को पार किया और पीछे किचन की तरफ खुलने वाली खिड़की का काँच तोड़ा,और अंदर कूद गया। नौकरानी खून से लथपथ बेहोश पड़ी थी। हॉल में लेसी घुटनों के बल बैठी कांप रही थी, और उसके माथे पर पिस्टल ताने खड़ी थी—सईदा!

वही सईदा, जिसकी एक झलक के लिए आरिफ पुरानी दुनिया में तरसता था। आज वह एक दीवानी, खूंखार आशिक की तरह खड़ी थी।

"सईदा! रुक जाओ!" आरिफ चिल्लाया।

"आरिफ!" सईदा की आंखों में कटीली दीवानगी थी। "इस औरत ने तुम्हें मुझसे दूर किया! तुम सिर्फ मेरे हो! अगर यह नहीं होगी, तो तुम मेरे पास आओगे!"

"नहीं सईदा! जिस आरिफ को तुम चाहती हो, वह मर चुका है! मैं वह इंसान नहीं हूँ!"

"तुम झूठ कह रहे हो! मैंने अपने माँ-बाप से तुम्हारे लिए लड़ाई कर ली, सब कुछ छोड़ दिया, अपनी ज़िंदगी के 8 साल, पूरे 8 साल बर्बाद कर दिए, डिप्रेशन में आ गई। जानते हो, कोई मुझे सहारा देने वाला नहीं था, मैं तुम्हारे लिए दिल्ली से यहाँ आई।' आरिफ एकदम खामोश, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

"दिल्ली से?' उसने सायदा से कहा

'हाँ, दिल्ली से! लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और इसीलिए मैं ढाका शहर आई, ताकि मैं तुम्हारे पास, तुम्हारे करीब रह सकूँ।' यह सब सुनकर आरिफ को ऐसा झटका लगा, जैसे ये वही जुमले हों, जो कभी उसने सायदा के लिए अपने मन में दोहराए थे। 8 सालों तक वह उसे जब तलाश नहीं कर सका, तो यूँ ही डिप्रेशन में रहा, घरवालों से उसका झगड़ा होता रहा, कितनी बार उसने घर को छोड़कर चले जाने का फ़ैसला किया और ढाका शहर आने की कोशिश की, लेकिन कभी उसका work वीज़ा नहीं लगा था,

"सईदा मेरी बात सुनो, जो कुछ भी हो रहा है या जो कुछ भी चल रहा है, मैं तुम्हें शांति से सब कुछ सच-सच बता दूँगा, समझा दूँगा। तुम प्लीज पहले इस गन (बंदूक) को नीचे रखो। देखो"

"तुम मुझसे प्यार नहीं करते। तुम इस, इस औरत से प्यार करते हो। है ना? है ना?"कहते-कहते जैसे सईदा की बात और आवाज़ हिंसक हो उठी। लेसी उसे बिल्कुल सहमते हुए देखने लगी

"सईदा, ऐसा मत करो DON'T!"

सईदा ने चीखते हुए ट्रिगर दबा दिया!

आरिफ ने आखिरी सेकंड में छलांग लगाई और सईदा को धक्का दिया। गोली दीवार में जा धंसी। दोनों खिड़की के शीशे तोड़ते हुए नीचे गिरने को हुए। कांच के टुकड़े सईदा के जिस्म में चुभ गए और वह जख्मी होकर बेहोश हो गई। आरिफ ने उसे संभालकर हाथ से गिरने से बचाते हुए अंदर खींचा।

कुछ ही देर में पुलिस और एम्बुलेंस वहाँ पहुँच गई। आरिफ के रसूख की वजह से सईदा पर सख्त कार्रवाई की जगह चिकित्सक की पुष्टि के बाद उसे मेंटल सोलिटरी कन्फाइनमेंट (मानसिक चिकित्सा केंद्र) भेज दिया गया। उसने पाया कि लेसी भी शॉक (सदमे) से बेहोश हो चुकी थीl उसकी रिक्वेस्ट (अनुरोध) के बाद आला अफसरों ने उसे यकीन दिलाया कि यह बात गोपनीय रखी जाएगी, ताकि इस घटना के बारे में न तो उसके सगे-संबंधियों को और न ही बाहरी खबरों (मीडिया) में किसी को पता चले।

अगली सुबह, ढाका के विशाल समुद्र तट (Beach) पर ठंडी हवाएं चल रही थीं। आरिफ समंदर की लहरों को देख रहा था। पास ही हर्ष खड़ा था।

"सईदा का इलाज शुरू हो गया है आरिफ," हर्ष ने कहा।

 "तीन-चार महीने में उसका पागलपन ठीक हो जाएगा।"
 
आरिफ की आंखों से आंसू छलक पड़े, "काश मेरी पुरानी दुनिया में भी किसी ने मेरे डिप्रेशन और मानसिक तकलीफ पर ध्यान दिया होता... पर मैं गरीब था, इसलिए किसी ने मेरी परवाह नहीं की।"

"अब तो तेरे पास सब कुछ है आरिफ," हर्ष ने उसे समझाना चाहा। "पैसा, शोहरत, लेसी का प्यार, माता-पिता का साथ... तू इस दुनिया को छोड़कर क्यों जाना चाहता है?"

आरिफ ने समुद्र की तरफ देखते हुए गहरी सांस ली, "हर्ष, यह सब बनावटी है। यह एक छलावा है। मैंने अपनी पुरानी जिंदगी में लालच किया था, खुदा से शिकायतें की थीं। खुदा ने मुझे यह आईना इसलिए दिखाया ताकि मैं समझ सकूं कि इंसान को मनचाही चीजें मिल भी जाएं, तब भी उसे सच्चा सुकून नहीं मिलता।"

"पर तू उस दुनिया में जाएगा कैसे? तेरा शरीर तो वहाँ है ही नहीं!" हर्ष की आवाज कांप गई।

"यह कहानी मुझसे शुरू हुई थी हर्ष," आरिफ मुस्कुराया। "जब मैं इस किरदार से बाहर निकल जाऊंगा, तो तुम सब भी इस मायाजाल से आजाद हो जाओगे। सईदा ठीक हो जाएगी, लेसी अपनी जिंदगी में लौट जाएगी। सबको अपनी असली नियति मिल जाएगी।"

"मत कर! मैं तेरा मतलब ठीक ढंग से समझ चुका हूँ। ऐसा मत कर। देख, हमने तरक्की की है ना? हमारा विज्ञान ज़रूर इसका भी कोई ना कोई हल एक ना एक दिन ज़रूर निकाल लेगा, मत कर भाई..." हर्ष फूट-फूटकर रो पड़ा।

"मत रोक मुझे, यह जरूरी है मेरी खातिर बात को समझ, मैं वादा करता हूँ मेरे जाते ही सब कुछ बदल जाएगा, मैं तो इस दुनिया के लिए पहले ही मर चुका हूँ...बस अपना ख्याल रखना भाई, don't stop me brother।"

 उसकी आँखों से भी आँसू छलक पड़े और उसने मुस्कुरा दिया, आरिफ ने हर्ष को आखिरी बार गले लगाया। इतना कहकर आरिफ गाड़ी की तरफ बढ़ा।
 
फिर वह अपनी स्पोर्ट्स कार में बैठा। उसने गियर बदला और एक्सीलेटर पर पूरा पैर दबा दिया।, उसे पता था कि उसे क्या करना है।,

कार हवा से बातें करती हुई चट्टान की तरफ बढ़ी। हर्ष चिल्लाता हुआ पीछे भागा, पर देर हो चुकी थी।
कार ने चट्टान से हवा में छलांग लगाई और सीधे समुद्र की खौलती हुई गहराइयों में जा गिरी!

एक भीषण आवाज़ हुई। हर्ष ने गाड़ी को समुद्र की गहराइयों में गिरते हुए देखा। वह आरिफ का नाम पुकारने लगा

कांच टूटने का भयानक शब्द हुआ। पानी बड़ी तेजी से कार के अंदर भरने लगा। आरिफ का सिर स्टेयरिंग से टकराया और उसमें से खून का फव्वारा फूट पड़ा। पानी फेफड़ों में घुस रहा था, दम घुट रहा था, असहनीय दर्द से जिस्म तड़प रहा था... आरिफ ने आंखें बंद कर लीं और खुदा का नाम लिया। कहीं दूर उसे हर्ष की खुद को पुकारती आवाज़ सुनाई दे रही थी और धीरे-धीरे वह आवाज़ उसकी माँ की आवाज़ में तब्दील होने लगी| उसकी आँखें बंद हो रही थीं, खुल रही थीं। वह पानी के अंदर डूबता जा रहा था। तभी घुटन भरे उस पानी के अंदर जैसे उसे अपनी माँ की आवाज़ साफ़ सुनाई देने लगी और धीरे-धीरे जब उसने दोबारा आँखें खोलीं, तो जैसे वह किसी लंबी नींद की गहराई से जागा। पास में पास में माँ ही उसे आवाज़ दे रही थीं, जो उसके सिरहाने के पास उसे धुंधलाहट भरी नज़रों से दिख रही बैठी थीं।"

"आरिफ! आरिफ! मेरी बच्ची की आंखें खुल रही हैं! डॉक्टर साहब देखिए!"

एक चीख आरिफ के कानों में गूंजी।

जब आरिफ ने दोबारा धीरे-धीरे अपनी भारी पलकें खोलीं, तो ऊपर झूमर नहीं था। वही पुरानी, सीलन भरी छत थी जिसकी पपड़ियां उतर रही थीं। सामने उसकी बीमार माँ रो रही थी और लाचार पिता डॉक्टर का हाथ जोड़ रहे थे।

"चमत्कार हो गया!" डॉक्टर ने कहा। "जो मरीज महीनों से गहरे कोमा और स्लीपिंग पैरालिसिस में था, वह जाग गया है!"

आरिफ ने अपने कमजोर हाथों को देखा। वही दुबला-पतला शरीर, वही दिल्ली की तंग गली का 2BHK का मकान, वही कंगाली।

लेकिन इस बार आरिफ के चेहरे पर कोई शिकायत नहीं थी। उसने अपनी मां के आंसुओं से भीगे गालों को चूमा।

दिन बीतने लगे। आरिफ ने होश में आने के बाद कभी सईदा को ढूंढने की कोशिश नहीं की—वह जान गया था कि सईदा अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश है। उसने कभी किसी विला या गाड़ियों की हसरत नहीं की। वह दिल्ली की सड़कों पर चुपचाप टैक्सी चलाने लगा और अपने मां-बाप के साथ ही रहने लग गया।

अक्सर रात को गाड़ी चलाते वक्त, उसे उस पैरेलल यूनिवर्स की याद आती—वह आलीशान महल, उसकी कंपनी और उसका अमीर-संपन्न परिवार, वो विलायती लड़की लेसी, उसका दोस्त हर्ष, प्रोफेसर क्लार्क और सईदा और उसकी  वो बंदूक...

लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरता गया, खुदा की मेहरबानी से वह दूसरी दुनिया की यादें धुंधली होती गईं... बिल्कुल किसी पुराने, खूबसूरत लेकिन झूठे ख्वाब की तरह।

निश्चित रूप से वह एक बार फिर अपने उन्हीं गरीबी, तंगी और मुश्किलों भरे दिनों (या परिस्थितियों) का सामना कर रहा था। But आरिफ अब मुस्कुराना सीख चुका था, क्योंकि वह समझ गया था कि जो हकीकत खुदा ने दी है, सुकून सिर्फ उसी को जीने में है।

पर एक सवाल उसके ज़हन में हमेशा तैरता रहेगा—कि क्या वाकई कोई दूसरी दुनिया हो सकती है? क्या वह दुनिया वाकई वजूद में थी, या फिर यह सिर्फ उसके मां-बाप के मुताबिक स्लीपिंग पैरालिसिस में देखा गया कोई अधूरा सपना भर था? क्या वाकई इस दुनिया का कोई ऐसा आईना है जिसके उस पार भी एक ऐसी ही दुनिया बसती है?

सिवाय खुदा के इस बात को कोई नहीं जानता। किसी ने सच ही कहा है कि इंसान सिर्फ अपने सामने खड़ी दीवार को देख सकता है, पर उस दीवार के उस पार क्या है—यह राज़ खुदा के सिवा कोई नहीं देख सकता। शायद इस बात पर दुनिया का बड़े से बड़ा वैज्ञानिक भी यकीन न करे, पर उसे हमेशा इंतजार रहेगा कि इन सारे सवालों के जवाब उसे किसी न किसी ज़रिए, ऊपर वाला इसी दुनिया में एक न एक दिन ज़रूर देगा,

या फिर एक बार और उसकी मौत हो जाने के बाद...।

The end ✍️
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